navy captain rakesh ranjan singh death: रांची के रहने वाले मर्चेंट नेवी कैप्टन राकेश रंजन सिंह की होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जहाज पर तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई. दुबई एयर ट्रैफिक कंट्रोल से एयरलिफ्ट की अनुमति न मिलने और इलाज में हुई देरी के कारण 24 साल का अनुभवी करियर समुद्र के बीच ही थम गया है.

navy captain rakesh ranjan singh death: झारखंड के रांची के रहने वाले मर्चेंट नेवी कैप्टन राकेश रंजन सिंह की समुद्र के बीच दर्दनाक मौत हो गई. मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर इस घटना में भी देखने को मिला. 47 साल के राकेश रंजन 2 फरवरी से एक ऑयल टैंकर जहाज पर तैनात थे. उनका जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से गुजर रहा था. इसी दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और हालात गंभीर हो गए.
बताया जा रहा है कि 18 मार्च को उन्होंने परिवार से आखिरी बार बात की थी. इसके कुछ समय बाद ही वह अपनी कुर्सी से गिर पड़े और बेहोश हो गए. जहाज पर तुरंत मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं थी. हालत बिगड़ने पर उन्हें एयरलिफ्ट करने की कोशिश की गई. लेकिन दुबई एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने इसकी अनुमति नहीं दी. इसके बाद उन्हें बोट के जरिए दुबई पोर्ट ले जाया गया. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और उनकी मौत हो गई.
इस खबर के बाद परिवार में शोक का माहौल है. रांची के अरगोड़ा इलाके में उनके घर पर मातम पसरा है. उनके बड़े भाई उमेश कुमार ने बताया कि राकेश उनके लिए बेटे जैसे थे. उनकी पत्नी और दो बच्चे गहरे सदमे में हैं. बच्चे अपने पिता का पार्थिव शरीर वापस लाने की मांग कर रहे हैं. पत्नी अंतिम बार उन्हें देखना चाहती हैं. पूरा परिवार इस दुखद घटना से टूट गया है.
कैप्टन राकेश रंजन मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले थे. पिछले करीब 18 सालों से उनका परिवार रांची में रह रहा था. उन्होंने मर्चेंट नेवी में करीब 24 साल तक सेवा दी. इस दौरान उन्होंने कई जहाजों पर काम किया. वह अपने काम में काफी अनुभवी थे. अंतिम समय तक वह ‘अवाना’ नाम के जहाज पर कैप्टन के रूप में तैनात थे.
इस मामले में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने परिवार से बात की है. उन्होंने हर संभव मदद का भरोसा दिया है. परिवार सरकार से मांग कर रहा है कि जल्द से जल्द पार्थिव शरीर रांची लाया जाए. ताकि अंतिम संस्कार और अंतिम दर्शन हो सके. यह घटना कई सवाल भी खड़े करती है. खासकर जहाजों पर मेडिकल सुविधा और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर.
