मिडिल ईस्ट में हो रही जंग ने तेल और गैस ही नहीं बल्कि रुपये पर भी काफी दबाव डाला. हालांकि, इसी बीच एक खुशखबरी सामने आ रही है. दरअसल, रुपये ने मार्केट में कमबैक कर लिया है. एक तरफ पूरी दुनिया में महंगाई है, तो भारत में रुपया अपने मिजाज बदलते हुए दिखाई दे रहा है.
जहां कल तक रुपया कमजोर था, तो आज वहीं रुपया एक दम से मजबूत दिखाई दे रहा है. सालों बाद रुपये में इतनी मजबूती देखने को मिली है. सिंतबर 2013 के बाद में पहली बार ऐसा बदलाव देखने को मिला है. हालांकि, रुपये में मजबूती लाने के लिए RBI ने काफी बड़ा मास्टरस्ट्रोक तैयार किया था. आइए जाने कैसे.
दरअसल, 1 अप्रैल को RBI ने बैंकों के लिए NDF बंद कर दिया है यानी की लोगों द्वारा भविष्य में डॉलर के महंगा होने की उम्मीद में किए जाने वाली सट्टेबाजी पर लगाम लगा दी. अब जिन कंपनियों ने विदेशी मुद्रा कॉनट्रैक्ट्स को कैंसिल किया है वह उसे दोबारा से बुक नहीं कर पाएंगे. डॉलर की बनावटी मांग को रोकने के लिए ऐसा किया गया था. जैसे ही RBI ने नियमों को सख्त किया कंपनियों और बैंकों ने अपने पास रखे हुए डॉलर को बाहर निकालना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से मार्केट में डॉलर की सप्लाई बढ़ गई.
इसी कारण से आज रुपए में इतने सालों बाद इतना उछाल देखने को मिला है. अगर ऐसा ही रहा था तो विदेशों से सामान खरीदने में थोड़ी राहत देखने को मिलेंगी. हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना हैं कि तेल की कीमत अगर कम नहीं हुई तो रुपए पर दबाव बना ही रहेगा. तेल के मंहगे होने पर रुपया नीचे गिरता है. इसी कारण से ऐसी संभावना जताई जा रही है कि जब तक सुधार नहीं तब तक रुपए की कीमत में बदलाव देखने को मिल सकता है. वहीं, अगर रुपया मजबूत बना रहता है तो इलेक्ट्रॉनिक्स समानों की महंगाई पर लगाम लगते हुए दिखाई दे सकता है.
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