संभल: पति पर एसिड अटैक के दिल दहलाने वाले मामले में जिला न्यायालय की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी महिला को दोषी करार दिया है. फास्ट ट्रैक कोर्ट ने जेल में बंद आरोपी महिला कहकंशा की जमानत याचिका भी रद्द कर दी है. आरोपी कहकंशा को फास्ट ट्रैक 1 जून को सजा का फैसला सुनायेगी.
जानें पूरा मामला
एसिड अटैक की आरोपी 2 बच्चों की मां कहकंशा ने 11 महीने पहले अवैध संबंधों का विरोध करने पर को बिजनौर के नगीना निवासी कहकंशा पुत्री अब्दुलरब ने पति मुजफ्फर अली पर बाल्टी में भर कर रखा गया तेजाब उड़ेल दिया था. तेजाब से मुजफ्फर अली की दोनों आँखों की रोशनी चली गई थी. उसका शरीर 60 फीसदी शरीर भी झुलस गया था. जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे मुजफ्फर अली का अभी भी अस्पताल में इलाज चल रहा है. ये मामला संभल थाना इलाके के बदायूं दरवाजा मोहल्ले का है. पीड़ित मुजफ्फर अली के मुताबिक उन्होंने 7 मार्च 2025 की सुबह 6 बजे अपनी पत्नी कहकंशा को घर में किसी अन्य व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा था. मुजफ्फर अली के अनुसार, इस कृत्य में कहकंशा के भाई मोहम्मद अहमद, इरफान, मोहसिन और सास महरून निशा भी शामिल थे.

कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका
इस मामले में सत्र न्यायाधीश आर्थिक फौजदार ने 12 जून 2025 को कहकंशा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी. बुधवार को अपर जनपद न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) गोपाल (HJS) ने सरकार बनाम कहकंशा मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 352, 351(2), 124(1), 109(1), 118(2) के तहत महिला को दोषी ठहराया.
फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला
संभल के बदायूं दरवाजा मोहल्ले में हुए चर्चित एसिड अटैक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने त्वरित सुनवाई करते हुए आरोपी महिला (कहकशां) को दोषी ठहराया है. कोर्ट ने जेल में बंद महिला की जमानत याचिका भी पूरी तरह खारिज कर दी है.
1 जून को सजा का एलान
अदालत इस जघन्य अपराध के लिए दोषी महिला को 1 जून 2026 को सजा सुनाएगी. कानूनविदों के मुताबिक, अपराध की गंभीरता को देखते हुए कड़ी सजा मिल सकती है.
पीड़ित की स्थिति
इस दिल दहला देने वाले हमले में मुजफ्फर अली का 60 फीसदी शरीर झुलस गया था और उसकी दोनों आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई थी. वह पिछले 10 महीने से अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है.
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