Sonam Wangchuk statement: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय मंत्रियों ने उनके अनशन खत्म होने की तस्वीरें मीडिया में लीक न करने का वादा तोड़कर उनका भरोसा तोड़ा है.

Sonam Wangchuk statement: नीट पेपर लीक के विरोध में 26 दिनों तक भूख हड़ताल करने वाले प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने अनशन खत्म होने की पूरी कहानी बयां की है. अस्पताल में अपना धरना समाप्त करने के बाद उन्होंने केंद्र सरकार के मंत्रियों पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया है. वांगचुक ने बताया कि वे सत्ता पक्ष, विपक्ष और छात्र नेताओं की मौजूदगी में ही अपना अनशन तोड़ना चाहते थे. लेकिन 24 जुलाई की आधी रात को मंत्रियों के अचानक अस्पताल पहुंचने और हड़बड़ी में तस्वीरें जारी करने की वजह से उनका पूरा प्लान बिगड़ गया.
मंत्रियों के सामने रखी थी ये खास शर्त
सोनम वांगचुक ने बताया कि जब केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह अनशन खत्म कराने आए, तो उन्होंने एक शर्त रखी थी. उनकी इच्छा थी कि जब वे सूप पीकर धरना समाप्त करें, तो वहां विपक्षी दलों के नेता और छात्र प्रतिनिधि भी साथ हों. वे एक संयुक्त कार्यक्रम के जरिए शांति का संदेश देना चाहते थे. जब यह संभव नहीं हो सका, तो उन्होंने तय किया कि वे पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं के साथ अपनी तस्वीरें खुद जारी करेंगे.
आईबी अधिकारियों के सामने हुआ था समझौता
वांगचुक के मुताबिक, मंत्रियों ने उनकी इस बात को स्वीकार कर लिया था. मौके पर मौजूद इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के वरिष्ठ अधिकारियों को इस समझौते का गवाह बनाया गया था. नियम यह तय हुआ था कि जब तक वांगचुक खुद तस्वीरें जारी नहीं करेंगे, तब तक मीडिया में कोई खबर या फोटो नहीं जाएगी. इस भरोसे पर ही वांगचुक ने केंद्रीय मंत्रियों के हाथों से सूप पीकर अपना अनशन समाप्त किया था.
5 मिनट में ही हांफते हुए पहुंचे आईबी के अफसर
लेकिन अनशन टूटने के महज 5 मिनट के भीतर ही सारा खेल बदल गया. आईबी के वरिष्ठ अधिकारी दौड़ते-हांफते हुए वांगचुक के पास आए और बताया कि अनशन खत्म होने की तस्वीरें मीडिया में चलने लगी हैं. मंत्री अपने साथ आए फोटोग्राफर से तस्वीरें पहले ही लीक करवा चुके थे. सोनम वांगचुक ने कहा कि इस तरह वादा तोड़कर सरकार ने उनका भरोसा पूरी तरह तोड़ दिया, जिससे वे बेहद निराश हुए हैं.
राहुल गांधी और कांग्रेस से नहीं मिला समय पर साथ
बातचीत के दौरान वांगचुक ने बताया कि उनकी पत्नी गीतांजलि ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी इस कार्यक्रम में शामिल करने की कोशिश की थी. हालांकि, कांग्रेस की तरफ से समय पर कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिल सका. वांगचुक ने यह भी कहा कि वे किसी भी राजनेता के खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने सरकारों को सलाह दी कि प्रदर्शनकारियों को सजा देने के बजाय उनके गुस्से और मांगों के पीछे की वजह समझनी चाहिए.
स्वास्थ्य में सुधार, लद्दाख लौटकर साझा किया अनुभव
लद्दाख स्थित अपने गांव से बात करते हुए सोनम वांगचुक ने बताया कि अब उनकी सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है. 26 दिनों के अनशन के दौरान उनका वजन 11 किलो घट गया था, जिसमें से उन्होंने 6 किलो वजन वापस हासिल कर लिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतंत्र का हिस्सा है और उन्हें इस छात्र आंदोलन का नेतृत्व करने का कोई पछतावा नहीं है.
