ED Action in West Bengal: ईडी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस को नगरपालिका भर्ती घोटाले में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत गिरफ्तार कर लिया है. जांच एजेंसी के अनुसार, सुजीत बोस ने अवैध नियुक्तियों के बदले आर्थिक लाभ लिया और अयान सील की कंपनी के साथ मिलकर भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया.

ED Action in West Bengal: ईडी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री सुजीत बोस को नगरपालिका भर्ती घोटाले मामले में गिरफ्तार कर लिया है. ईडी ने लंबे समय से चल रही पूछताछ और जांच के बाद यह कार्रवाई की. अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ के दौरान सुजीत बोस को कई अहम दस्तावेज और सबूत दिखाए गए. इसके बाद एजेंसी ने उन्हें हिरासत में ले लिया. ईडी का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की गई थी और कई लोगों को गलत तरीके से नौकरी दिलाई गई.
जांच एजेंसी के अनुसार सुजीत बोस ने साउथ दमदम नगरपालिका में भर्ती के लिए करीब 150 उम्मीदवारों की सिफारिश की थी. आरोप है कि इन सिफारिशों के बदले आर्थिक फायदा लिया गया. ईडी का कहना है कि जांच में कुछ ऐसे फ्लैट और संपत्तियां सामने आई हैं, जिन्हें कथित तौर पर इसी मामले से जुड़ी कमाई से खरीदा गया था. एजेंसी ने इन संपत्तियों को “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” यानी अपराध से अर्जित संपत्ति माना है. इसके अलावा कुछ बैंक खातों में भारी मात्रा में नकद जमा होने के सबूत भी मिले हैं.
इस मामले की जांच पहले से चल रही थी. अक्टूबर 2025 में ईडी ने पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर छापेमारी की थी. उस दौरान सुजीत बोस और दूसरे नेताओं से जुड़े ठिकानों की तलाशी ली गई थी. जांच एजेंसी को छापेमारी के दौरान कई जरूरी दस्तावेज और करीब 45 लाख रुपये नकद मिले थे. ईडी का कहना है कि इन्हीं सबूतों के आधार पर आगे की जांच तेज की गई. अब एजेंसी सुजीत बोस को विशेष अदालत में पेश करेगी और रिमांड की मांग कर सकती है.
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल के कई नगर निगमों और नगरपालिकाओं में हुई कथित अवैध भर्तियों से जुड़ा हुआ है. जांच में सामने आया कि मजदूर. स्वीपर. क्लर्क. चपरासी. ड्राइवर और पंप ऑपरेटर जैसे पदों पर नियमों के खिलाफ नियुक्तियां की गईं. ईडी का दावा है कि कई नगरपालिकाओं में भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया गया. इनमें साउथ दमदम. कमरहाटी. टीटागढ़. बरानगर. हलिशहर और न्यू बैरकपुर जैसी जगहों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं.
जांच एजेंसी के मुताबिक इस मामले में अयान सील और उनकी कंपनी ABS Infozon Pvt Ltd की भी भूमिका सामने आई है. आरोप है कि कंपनी को परीक्षा से जुड़े कई काम दिए गए थे. जैसे प्रश्नपत्र छापना. ओएमआर शीट तैयार करना और मेरिट लिस्ट बनाना. ईडी का कहना है कि इसी प्रक्रिया में हेरफेर कर पैसों के बदले अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाई गई. एजेंसी पहले ही इस मामले में अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल कर चुकी है और अब आगे की जांच जारी है.
