Supreme Court Stray: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा पशुओं की समस्या पर सुनवाई करते हुए कहा कि लोग काम खत्म होते ही मवेशियों को सड़कों पर छोड़ देते हैं और 2007 में सांड के हमले में पति को खोने वाली महिला को 15 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया.

Supreme Court Stray: सुप्रीम कोर्ट ने सड़कों पर घूमते आवारा पशुओं और उनके प्रति इंसानों के व्यवहार पर बहुत ही गंभीर बात कही है. अदालत ने कहा कि जब तक जानवर लोगों के काम आते हैं, तब तक वे उन्हें अपने पास रखते हैं. लेकिन जैसे ही जानवरों की उपयोगिता खत्म हो जाती है, उन्हें बिना किसी सुरक्षा की परवाह किए सड़कों पर आवारा भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई इंसान अपने परिवार का पेट भरने के लिए जानवरों का इस्तेमाल कर ले तो लोगों को बहुत बुरा लग जाता है.
‘जब तक काम है तब तक रखते हैं पास’
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ए कोटिश्वर सिंह की बेंच ने गहरी चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि जो लोग जानवरों को अपने घर लाते हैं या पालते हैं, यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे जीवन भर उनका ख्याल रखें. हालांकि आज की हकीकत बिल्कुल अलग है. लोग जानवरों का आर्थिक इस्तेमाल करते हैं. जब वे बूढ़े या अनुपयोगी हो जाते हैं तो उन्हें लावारिस छोड़ दिया जाता है.
‘पेट भरने के लिए इस्तेमाल करने पर आपत्ति क्यों?’
अदालत ने इंसानी सोच के विरोधाभास पर तीखा सवाल उठाया. बेंच ने कहा कि एक तरफ तो लोग अपने मवेशियों की सुरक्षा की जरा भी परवाह नहीं करते और उन्हें सड़कों पर मरने के लिए छोड़ देते हैं. वहीं दूसरी तरफ, अगर कोई व्यक्ति अपनी भूख मिटाने या परिवार का पेट भरने के लिए उनका उपयोग कर लेता है तो समाज को यह बात बुरी लग जाती है. यह दोहरी सोच इंसानी दुनिया की बड़ी खामी को दिखाती है.
‘सड़कों पर छोड़ना कोई समाधान नहीं’
कोर्ट ने माना कि कई किसानों और डेयरी मालिकों के पास इतने पैसे नहीं होते कि वे अनुत्पादक हो चुके पशुओं को हमेशा खाना दे सकें. लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जानवरों को आवारा छोड़ दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि अगर कोई मालिक अपने मवेशी को आगे नहीं संभाल सकता, तो उसे उसे सड़कों पर फेंकने के बजाय किसी सरकारी या अधिकृत शेल्टर (गौशाला) तक पहुंचाना चाहिए.
24 राज्यों में कानून, फिर भी व्यवस्था लाचार
अदालत ने इस बात का भी जिक्र किया कि देश के 24 राज्यों में गोवंश हत्या के खिलाफ कड़े कानून बने हुए हैं. इसके बावजूद पशुओं की देखभाल और सुरक्षा से जुड़े नियमों को ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है. अदालत ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं और सही नीतियां बनाएं.
2007 के हादसे में पीड़ित महिला को मिला 15 लाख का मुआवजा
यह पूरा मामला साल 2007 में पंजाब के संगरूर में हुई एक दर्दनाक घटना से जुड़ा है. वहां आवारा सांड के हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई थी. मृतक की पत्नी ने मुआवजे के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी. सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित विधवा की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे 15 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐतिहासिक आदेश सुनाया. इसी याचिका पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने आवारा पशुओं की समस्या पर ये महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं.
