तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में मौजूद पोट्टमलोड्डी गांव अपनी अनोखी खासियत के कारण जाना जाता है. इस गांव में दूध बेचा नहीं जाता, बल्कि जरूरतमंदों में बांटा जाता है. गांव के लोगों ने आज तक बाहर से या पैकेट वाला दूध नहीं खरीदा है.
सुबह के समय शहरों में लोग रोजाना पैकेट वाला दूध खरीदकर चाय बनाते हैं या दूध को पीते हैं. हालांकि गांवों में ऐसा नहीं है. गांवों में भी दूध खरीदा जााता है, लेकिन यहां पैकेट में नहीं लिया जाता. लोग गांवों में डिब्बों में दूध ले जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा भी गांव है. जहां दूध बेचा नहीं, बल्कि बांटा जाता है. यही नहीं इस गांव में आज तक किसी ने बाहर से या पैकेट वाला दूध नहीं खरीदा है.
गांव में रहते हैं 50 परिवार
तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में मौजूद पोट्टमलोड्डी गांव अपनी अनोखी परम्परा के कारण जाना जाता है. जानकारी के मुताबिक इस गांव में सिर्फ 50 परिवार रहते हैं, लेकिन इस छोटे से गांव में 250 से अधिक गाय और बकरियां हैं. ग्रामीण उन्हें महज जानवर नहीं मानते, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं. पूरे गांव ने तीन चरवाहे नियुक्त किए हैं, जो प्रतिदिन मवेशियों को चराने ले जाते हैं.
बेचने की जगह बांटा जाता है दूध
आपको बता दें कि यहां सुबह मवेशियों को चराने जाना और शाम को गांव लौटना ही लोगों की दिनचर्या है. इस गांव की असली खासियत ये है कि यहां गायों से कितना भी दूध निकले, उसे दुग्ध केंद्रों में नहीं ले जाया जाता. साथ ही उसे न ही बाजार में बेचा जाता है. अगर किसी घर में ज्यादा दूध हो जाता है, तो जरूरतमंदों को दे दिया जाता है. अगर किसी दूसरे घर में ज्यादा दूध हो जाता है, तो उसे भी बांट दिया जाता है.
लोगों ने नहीं खरीदा दूध
बताया जा रहा है कि पोट्टमलोड्डी गांव में लोगों ने आज तक बाहर से दूध या उसका पैकेट नहीं खरीदा है, क्योंकि उनके घरों में जरूरत का दूध मौजूद है. एक ओर दूध खरीदती दुनियां है, तो दूसरी ओर दूध बांटने वाला ये गांव. पशुओं को जहां मात्र आय का स्रोत माना जाता है, वहीं दूसरी ओर उन्हें इस गांव में लोग परिवार के सदस्य की तरह रखते हैं. पट्टामलोड्डी गांव आज भी दूध के पैकेटों से और मिलावट से दूर है.
