UP politics Brahmin vote factor: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने प्रबुद्ध सम्मेलन के जरिए प्रदेश के प्रभावशाली ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के लिए बड़ा सियासी दांव चला है.

UP politics Brahmin vote factor: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी ने हाल ही में लखनऊ में आयोजित प्रबुद्ध सम्मेलन के जरिए यह साफ कर दिया कि उसकी नजर अब भाजपा के मजबूत वोट बैंक पर है. प्रदेश की करीब 100 विधानसभा सीटों पर असर रखने वाले ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए सपा नए-नए समीकरण साध रही है. सम्मेलन में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के हाथों में त्रिशूल, डमरू की गूंज और शिव तांडव स्तोत्र के पाठ के साथ पार्टी ने नए सियासी अध्याय की शुरुआत की है.
अखिलेश यादव ने दी PDA की नई परिभाषा
प्रबुद्ध सम्मेलन के दौरान अखिलेश यादव ने अपने चर्चित ‘पीडीए’ फॉर्मूले की बिल्कुल नई व्याख्या पेश की. उन्होंने कहा कि जो लोग पीडीए का गलत मतलब निकालते हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि इसमें ‘पीडी’ का सीधा मतलब पंडित यानी ब्राह्मण समाज से है. अखिलेश ने कहा कि जो जितनी ज्यादा पीड़ा देगा, यह समीकरण उतना ही मजबूत होकर उभरेगा. उन्होंने भगवान कृष्ण और सुदामा की पौराणिक मिसाल देते हुए कहा कि सपा ने हमेशा हर वर्ग को पूरा मान-सम्मान देने का काम किया है.
यूपी में हमेशा निर्णायक रहा है ब्राह्मण वोट
उत्तर प्रदेश की राजनीति का इतिहास देखें तो ब्राह्मण समाज हमेशा से सत्ता की चाबी रहा है. आजादी के बाद लंबे समय तक यह वर्ग कांग्रेस के साथ जुड़ा रहा और प्रदेश को 6 ब्राह्मण मुख्यमंत्री मिले. हालांकि, राम मंदिर आंदोलन के बाद यह बड़ा वोट बैंक भाजपा की तरफ झुक गया. साल 2007 में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने में भी ब्राह्मण मतदाताओं की बड़ी भूमिका मानी जाती है. आंकड़े बताते हैं कि 2007 से जिस दल के पास सबसे ज्यादा ब्राह्मण विधायक रहे, सत्ता उसी को मिली है.
भाजपा का सपा पर तीखा हमला
समाजवादी पार्टी की इस नई चुनावी रणनीति पर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया है. यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी हालत ‘सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली’ जैसी है. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल में हमेशा अराजकता, गुंडागर्दी और सनातन संस्कृति को नुकसान पहुंचाने का काम हुआ है. भाजपा का कहना है कि प्रदेश की जनता और ब्राह्मण समाज सपा के इन दावों पर कभी भरोसा नहीं करेगा.
राम मंदिर मुद्दे पर भी गरमाई सियासत
ब्राह्मण सम्मेलन के साथ-साथ राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर भी संसद से लेकर यूपी विधानसभा तक हंगामा जारी है. विपक्षी विधायक हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. सपा के विधायक सचिन यादव विधानसभा परिसर के बाहर धरने पर बैठे नजर आए. समाजवादी पार्टी राम मंदिर से जुड़े विवादों और ब्राह्मण वर्ग को साधकर भाजपा के हिंदू वोट बैंक में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश कर रही है.
2027 चुनाव के लिए बढ़ा सियासी पारा
लखनऊ से लेकर दिल्ली तक इस समय यूपी की राजनीति को लेकर खींचतान जारी है. सपा जहां अपने पुराने वोट बैंक के साथ सवर्णों को जोड़कर नया समीकरण बनाना चाहती है, वहीं भाजपा अपने मजबूत गढ़ को बचाने में जुटी है. पारंपरिक रूप से भाजपा के साथ रहने वाले इस वोट बैंक को अपनी ओर खींचना सपा के लिए एक बड़ी चुनौती जरूर है. आने वाले समय में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि यह नया सियासी दांव चुनाव में क्या रंग लाता है.
