CJI Suryakant on Cockroach protest: दिल्ली के कॉकरोच प्रदर्शन पर सुनवाई करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि भटके हुए युवाओं पर लाठियां चलाने के बजाय उन्हें काउंसलिंग और प्यार से समझाने की जरूरत है.

CJI Suryakant on Cockroach protest: राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए ‘कॉकरोच प्रदर्शन’ को लेकर मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया है. प्रदर्शन के दौरान आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले युवाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है. याचिका में ऐसे युवाओं को सात दिन की सामाजिक सेवा की सजा देने का सुझाव दिया गया है. इस मामले की सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण रुख अपनाया है. कोर्ट इस याचिका पर पहले से दर्ज अन्य मामलों के साथ मिलाकर सुनवाई करेगा.
युवाओं के प्रति पुलिस को दिखाना होगा संयम
मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों को ऐसे मामलों में काफी संयम से काम लेना चाहिए. अगर भटके हुए युवा गुस्से में आकर कोई गलत कदम उठा भी लेते हैं, तो उन पर तुरंत लाठियां चलाना सही रास्ता नहीं है. उन्हें डराने या धमकाने के बजाय प्यार से समझाने की कोशिश करनी चाहिए. मुख्य न्यायाधीश का मानना है कि युवाओं को कड़े दंड की नहीं, बल्कि सही दिशा और काउंसलिंग की जरूरत होती है.
कड़े रवैये से बिगड सकती है बात
मुख्य न्यायाधीश ने सरकार और पुलिस प्रशासन को आगाह करते हुए कहा कि बहुत ज्यादा सख्ती बरतने से बात संभलने की बजाय और बिगड़ सकती है. अगर प्रशासन का रवैया आक्रामक होगा, तो इससे समाज में तनाव और ज्यादा फैलेगा. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ऐसी किसी भी स्थिति से बचना चाहिए जो माहौल को और ज्यादा खराब करे. अधिकारियों को चाहिए कि वे मामले को शांति से सुलझाने की दिशा में काम करें.
युवाओं की नाराजगी की वजह समझना जरूरी
CJI सूर्यकांत ने इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में सबसे बड़ी जरूरत युवाओं की बात को ध्यान से सुनने की है. प्रशासन को यह समझना होगा कि युवा आखिर इतने नाराज क्यों हैं. वे किस वजह से सड़कों पर उतरकर इस तरह का विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हुए हैं. जब तक उनकी असली समस्याओं को समझा नहीं जाएगा, तब तक किसी भी मसले का स्थायी और सही समाधान नहीं निकाला जा सकता.
सुरक्षा एजेंसियों के अनुभव पर जताया भरोसा
हालांकि कोर्ट ने युवाओं के प्रति सहानुभूति दिखाई, लेकिन यह भी साफ किया कि जमीन पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना सुरक्षा एजेंसियों का ही काम है. CJI ने कहा कि पुलिस और स्थानीय एजेंसियों के पास ऐसी जटिल परिस्थितियों को संभालने का लंबा अनुभव होता है. वे किसी भी अन्य संस्था से बेहतर जानती हैं कि मौके पर हालात को कैसे काबू में रखा जाए. इसलिए जमीनी फैसले एजेंसियों पर ही छोड़े जाने चाहिए.
याचिका में उठी थी सामाजिक सेवा की मांग
इस पूरी सुनवाई की शुरुआत उस याचिका से हुई थी, जिसमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया. युवाओं को सही राह पर लाने के लिए उन्हें सजा के तौर पर सात दिन की कम्युनिटी सर्विस दी जानी चाहिए. अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले पर अन्य याचिकाओं के साथ आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगा.
