uttarakhand economic survey 2024-25: उत्तराखंड के आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था ₹3.81 लाख करोड़ पहुंच गई है और प्रति व्यक्ति आय ₹2.73 लाख हो गई है. स्टार्टअप, एमएसएमई और बुनियादी ढांचे में हुई भारी प्रगति राज्य के मजबूत आर्थिक भविष्य की ओर इशारा कर रही है.

uttarakhand economic survey 2024-25: उत्तराखंड के आर्थिक सर्वेक्षण में राज्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम आंकड़े सामने आए हैं. सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी 3,81,889 करोड़ रुपये रहा. वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा करीब 2.54 लाख करोड़ रुपये था. यानी कुछ ही सालों में राज्य की अर्थव्यवस्था में डेढ़ गुना से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके साथ ही प्रति व्यक्ति आय में भी अच्छा इजाफा हुआ है. वर्ष 2021-22 में यह 1,94,670 रुपये थी. जो अब बढ़कर 2024-25 में 2,73,921 रुपये हो गई है. इस बार आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च के सहयोग से तैयार की गई है.
आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया कि राज्य की आर्थिक वृद्धि दर 2024-25 में 7.23 प्रतिशत रही. गरीबी से जुड़े मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स में भी सुधार हुआ है. वर्ष 2021-22 में यह 9.7 प्रतिशत था. जो घटकर 2024-25 में 6.92 प्रतिशत रह गया. रोजगार के क्षेत्र में भी स्थिति बेहतर हुई है. लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 60.1 प्रतिशत से बढ़कर 64.4 प्रतिशत हो गया है. यानी रोजगार में लगभग 4.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. मानव विकास सूचकांक में भी सुधार हुआ है. वर्ष 2001 में यह 0.247 था. जो धीरे-धीरे बढ़कर 2024-25 में 0.722 तक पहुंच गया है.
उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में भी राज्य ने अच्छी प्रगति की है. वर्ष 2021-22 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग यानी एमएसएमई की संख्या 59,798 थी. जो 2024-25 में बढ़कर 79,394 हो गई है. इन उद्योगों में काम करने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है. वर्ष 2022 में यह 3,43,922 थी. जो 2025 में बढ़कर 4,56,605 हो गई. बड़े उद्योगों की संख्या भी 107 से बढ़कर 128 हो गई है. स्टार्टअप के क्षेत्र में भी राज्य ने तेजी से कदम बढ़ाए हैं. वर्ष 2017 तक राज्य में एक भी स्टार्टअप नहीं था. लेकिन 2024-25 तक इनकी संख्या बढ़कर 1750 हो गई है.
बुनियादी ढांचे और शिक्षा के क्षेत्र में भी विकास देखने को मिला है. राज्य में सड़कों की कुल लंबाई 50,393 किलोमीटर से बढ़कर 51,278 किलोमीटर हो गई है. वर्ष 2022 तक जहां केवल 2 हेलीपोर्ट थे. वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 7 हो गई है. हेलीपैड की संख्या भी 60 से बढ़कर 118 हो गई है. स्कूलों में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी आई है. प्राथमिक स्कूलों में ड्रॉपआउट दर 1.64 प्रतिशत से घटकर 1.41 प्रतिशत हो गई है. वहीं माध्यमिक स्कूलों में यह 7.65 प्रतिशत से घटकर 4.59 प्रतिशत रह गई है. राज्य में डिग्री कॉलेजों की संख्या 124 से बढ़कर 139 हो गई है.
ऊर्जा, कृषि और पर्यटन के क्षेत्र में भी कई सकारात्मक बदलाव हुए हैं. बिजली उत्पादन 5157 मिलियन यूनिट से बढ़कर 16500 मिलियन यूनिट हो गया है. सौर ऊर्जा उत्पादन 439 मेगावाट से बढ़कर 1027 मेगावाट हो गया है. शिशु मृत्यु दर 22 से घटकर 20 हो गई है. मातृ मृत्यु दर भी 103 से घटकर 91 पर आ गई है. राज्य में अब सभी घरों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध है. धान और गेहूं का उत्पादन भी बढ़ा है. दूध और मछली उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है. पर्यटन के क्षेत्र में होटल और होमस्टे की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह आंकड़े राज्य के विकास और सुशासन के प्रयासों का परिणाम हैं. उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार बढ़ाने और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है. साथ ही वर्ष 2026-27 के लिए राज्य की जीएसडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है.
