uttarayani kauthik mahotsav 2026: देहरादून में आयोजित चार दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 का भव्य समापन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में हुआ, जहां लोक संस्कृति, साहित्य और लोकगीतों की शानदार झलक देखने को मिली है.

uttarayani kauthik mahotsav 2026: देहरादून के परेड ग्राउंड में सेवा संकल्प फाउंडेशन की ओर से आयोजित चार दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 का भव्य समापन हुआ. समापन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. मुख्यमंत्री ने सफल आयोजन के लिए सेवा संकल्प फाउंडेशन को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि यह महोत्सव उत्तराखंड की आत्मा, लोक संस्कृति और परंपराओं का सजीव रूप है. ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं. लोक कला, भाषा और परंपराओं के संरक्षण में बड़ी भूमिका निभाते हैं. उन्होंने कहा कि उत्तरायणी कौथिक जैसे उत्सव राज्य की पहचान को देश और दुनिया में मजबूत करते हैं. साथ ही स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और उत्पादों को बड़ा मंच भी देते हैं. सरकार आगे भी ऐसे आयोजनों को पूरा सहयोग देती रहेगी.
पूर्व राज्यपाल और पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति से लोगों का गहरा जुड़ाव है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी राज्य की परंपराओं से विशेष लगाव है. उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाएं और बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति बांसुरी जैसी है. जिसे सुनने के लिए शांति की जरूरत होती है. उन्होंने मातृभाषा को बचाने पर जोर दिया. सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी गीता धामी ने कहा कि चार दिनों तक चले इस महोत्सव में उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक उत्पाद और जीवनशैली को सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया. उन्होंने कहा कि यह आयोजन पूरे राज्य का है. इसमें राज्य के हर कोने से लोग जुड़े. युवा पीढ़ी को इतिहास से जोड़ना और भविष्य को मजबूत बनाना जरूरी है.
गीता धामी ने कहा कि आधुनिकता के साथ संस्कृति का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है. जब तक संस्कृति जीवित रहेगी, पहचान और सम्मान बना रहेगा. उन्होंने स्थानीय उत्पादों को अधिक से अधिक खरीदने की अपील की. जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत हो और आत्मनिर्भर उत्तराखंड का सपना पूरा हो सके. उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने विकास की नई दिशा पकड़ी है. समान नागरिक संहिता लागू हुई है. नकल विरोधी कानून से युवाओं को अवसर मिले हैं. कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि यह महोत्सव लोक संस्कृति, पारंपरिक खानपान और प्रतिभाओं को एक मंच देने का बड़ा प्रयास है. यहां कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ विद्यार्थियों की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं.
समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया. इनमें महावीर लाल, अनुश्रिया गुलाटी, मनमोहन भारद्वाज, शशि थपलियाल, पुष्पा देवी, कन्हैया सिंह, संजना मंडल, अपर्णा पनेरू, चम्पा पांगती और राजमती देवी शामिल रहे. मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे सम्मान समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वालों को प्रेरित करते हैं. महोत्सव में साहित्यिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहे. कवि सम्मेलन में समाज, संस्कृति और देशभक्ति से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत की गईं. हास्य, ओज और संवेदना से भरी कविताओं पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं. पूरे पंडाल में साहित्यिक उत्साह का माहौल बना रहा.

लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने भी लोगों का मन मोह लिया. इंद्र आर्या, बीके सामंत, मनमोहन बटकोरा, रेशमा शाह और अरविंद राणा के गीतों पर दर्शक झूमते नजर आए. नशा मुक्ति अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित हुआ. सीआईएमएस कॉलेज के छात्रों ने नशे के दुष्प्रभाव पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया. मोंटेसरी स्कूल के बच्चों ने रिजर्व गंगा अवतरण प्रस्तुति दी. संगीतिमय योग और कथक नृत्य ने सांस्कृतिक संध्या को और खास बना दिया. नींबू सानो प्रतियोगिता में रेखा, प्रियंका विष्ट और सममणि जोशी ने पहला पुरस्कार जीता. तारा देवी, वंदनी और पंकज कुमार को दूसरा पुरस्कार मिला. भूपाल सिंह नेगी और गीता नेगी को तीसरा पुरस्कार दिया गया. कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.
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