9 नवंबर साल 2000 में उत्तर प्रदेश के उत्तरी भाग से अलग होकर भारत का एक नया 27वां राज्य बनता है, जिसे उत्तरांचल के नाम से जाना गया था. लेकिन जनवरी साल 2007 में इसका नाम बदल दिया गया, जिसके बाद आज हम इस राज्य को उत्तराखंड के नाम से जानते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं, कि साल 2000 के उत्तराखंड और साल 2025 के उत्तराखंड राज्य में कितना फर्क है और सरकार ने इस राज्य को किस तरह से बदला है? इस रिपोर्ट में हम आपको शुरुआती उत्तराखंड और साल 2025 के उत्तराखंड के बीच के अंतर और इसकी कहानी को बता रहे हैं.
कैसा था शुरुआती उत्तराखंड?
साल 2000 में 9 नवंबर को उत्तराखंड भारत के 27वें राज्य के रूप में एक नया राज्य बनता है. लेकिन जब इसका गठन हुआ था, उस समय राज्य के सामने कई बड़ी चुनौतियां शामिल थीं. जिसमें कमजोर अर्थव्यवस्था, रोजगार की कमी और पहाड़ी क्षेत्रों से लोगों का तेजी से पलायन होनी जैसी समस्याएं सामने थीं. राज्य में शुरुआती दौर में व्यापार और सड़कों जैसी सुविधाएं भी नहीं थीं. लोगों को यहां स्वास्थ्य सुविधाएं भी काफी सीमित देखने को मिलती थीं. इस राज्य के शुरुआती दौर में सरकारी राजस्व काफी कम था और सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी एक बढ़िया और अनुशासित प्रशासनिक ढांचा खड़ा करनी थी.
कैसा है आज साल 2025 का उत्तराखंड?
आज के समय में साल 2025 में उत्तराखंड के 25 साल पूरे हो चुके हैं, इन 25 सालों में उत्तराखंड की तस्वीर काफी अलग तरह से नजर आती है. साल 2025 में प्रदेश की अर्थव्यवस्था से लेकर सड़कें, कनेक्टिविटी, पर्यटन और डिजिटल सेवाओं में काफी बदलाव आए हैं. आज के समय में उत्तराखंड राज्य आधुनिक सुविधाओं के साथ में देश का एक उभरता पहाड़ी राज्य बनकर सामने आया है.
उत्तराखंड का औद्योगिक विकास

साल 2000 में उत्तराखंड के शुरुआती दौर में यहां गिनती के ही कुछ उद्योग थे, लेकिन साल 2025 में उत्तराखंड में हजारों की संख्या में MSME और बड़े स्तर पर उद्योग काम कर रहे हैं. साल 2025 में SIDCUL जैसे औद्योगिक क्षेत्रों ने उधम सिंह नगर, काशीपुर और हरिद्वार को आर्थिक केंद्र बना लिया है. उत्तराखंड में इन 25 सालों में हजारों किमी की सड़कों का निर्माण हुआ है, जिससे प्रदेश को एक नया रूप मिला है.
साल 2021 में पुष्कर सिंह धामी नेतृत्व की सरकार
जुलाई 2021 में जब पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने, उसके बाद प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह से बदल गई. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला तब सरकार के सामने बेरोजगारी, भर्ती घोटाले और युवाओं का सरकार से टूटा हुआ भरोसा जैसी समस्याएं थीं. लेकिन धामी सरकार ने शुरुआत में ही यह साफ कर दिया कि सरकार का फोकस पूरी तरह से अनुशासन और पारदर्शिता और सख्त फैसलों के ऊपर रहेगा. जिसके बाद सरकार ने प्रदेश में कई योजनाओं और कानूनों को लागू किया, जिससे प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह से बद गई है.
धामी सरकार के बड़े फैसले

पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद में कई बड़े फैसले लिए, जिसमें से सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला नकल विरोधी कानून का था. सरकार के इस कानून ने भर्ती परीक्षाओं में पूरी तरह से पारदर्शिता ला दी और नकल माफियाओं के ऊपर बुरी तरह से शिकंजा कस दिया. सरकार के इस फैसले से प्रदेश के लाखों युवाओं का सरकार के ऊपर फिर से भरोसा कायम हो गया. साल 2021 से साल 2025 के बीच में पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने हजारों सरकारी भर्तियों को पूरा कराया है. सरकार ने पुलिस, शिक्षक और तकनीक और ग्रुप-C पदों के ऊपर भर्तियों को पूरा कराया. जिससे पूरे प्रदेश में यह मैसेज गया कि धामी सरकार सिर्फ घोषणा करने वाली नहीं बल्कि नतीजे देने वाली सरकार है.
समान नागरिक संहिता (UCC)
धामी सरकार के सबसे बड़े फैसलों में से एक फैसला प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करना था. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया जहां UCC लागू हुई. सरकार का यह फैसला सामाजिक समानता, कमान कानून व्यवस्था और महिला अधिकारों की दिशा में काफी अहम था. सरकार के इस फैसले ने प्रदेश को राष्ट्रीय राजनीति में एक अलग पहचान दिलाई.
महिलाओं के लिए धामी सरकार की योजनाएं
उत्तराखंड की धामी सरकार ने महिलाओं के विकास को लेकर कई योजनाएं चलाईं. सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को विकास के केंद्र में रखा है. सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30% आरक्षण, स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने के साथ लखपति दीदी योजना और सख्त कानून व्यवस्था ने प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाया है.
धामी सरकार में कानून-व्यवस्था और जीरो टॉलरेंस नीति
उत्तराखंड में धामी सरकार की सबसे बड़ी पहचान जीरो टॉलरेंस नीति बनी हुई है. प्रदेश में सरकार अवैध अतिक्रमण, माफियाओं और अपराधियों के खिलाफ काफी सख्ती से कार्रवाई कर रही है, जिससे प्रशासन और अनुशासन काफी मजबूत हो गया है. जिससे प्रदेश में रहने वाली आम जनता में सुरक्षा और भरोसे को लेकर माहौन बन गया है.
साल 2000 का उत्तराखंड VS साल 2025 का उत्तराखंड
साल 2000 में शुरुआती दौर में उत्तराखंड राज्य एक संघर्षरत राज्य के रूप में अलग हुआ था. लेकिन आज साल 2025 में यही राज्य मजबूत अर्थव्यवस्था और एक विकसित राज्य के रूप में अपनी तस्वीर पेश करता है. साल 2021 में प्रदेश में धामी सरकार आने के बाद में काफी ज्यादा बदलाव आया है, जिससे उत्तराखंड राज्य को देश में एक अलग पहचान मिली है. पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के फैसलों ने प्रदेश के विकास और बदलाव को पहले से कई गुना तेज कर दिया है.
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