west bengal election result 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के बाद पाकिस्तान से संचालित होने वाले कई फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स का खुलासा हुआ है, जो हिंसा और मौतों की भ्रामक खबरें फैलाकर देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. जांच में पता चला है कि इन्ही अकाउंट्स ने पहले नोएडा में भी फर्जी खबरें फैलाई थीं, इसलिए पुलिस ने लोगों को किसी भी जानकारी को बिना जांचे शेयर न करने की सलाह दी है.

west bengal election result 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के बाद सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों की संख्या तेजी से बढ़ गई है. खास बात यह है कि इन अफवाहों के पीछे पाकिस्तान से चल रहे कुछ संदिग्ध अकाउंट्स का हाथ सामने आया है. ये अकाउंट्स लगातार झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाकर देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. पहले भी नोएडा में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान इसी तरह की फर्जी खबरें वायरल हुई थीं. अब जांच में इन मामलों के बीच कनेक्शन सामने आया है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स यानी पहले के ट्विटर पर ऐसी कई पोस्ट सामने आई हैं. ये पोस्ट देखने में सामान्य लगती हैं. लेकिन इनमें दी गई जानकारी पूरी तरह गलत होती है. चुनाव के बाद अचानक इन पोस्ट्स की संख्या बढ़ गई है. इनमें हिंसा, मौत और सरकारी कार्रवाई से जुड़ी झूठी बातें फैलाई जा रही हैं. इनका मकसद लोगों के बीच डर और भ्रम पैदा करना है. कई लोग बिना जांच किए इन खबरों को आगे भी शेयर कर देते हैं.
कोलकाता पुलिस ने ऐसे ही एक संदिग्ध अकाउंट की जांच की. यह अकाउंट “Anushi Tiwari proud Indian” नाम से चल रहा था. पहली नजर में यह किसी भारतीय यूजर का अकाउंट लगता था. लेकिन जांच में पता चला कि इसके पीछे की सच्चाई अलग है. इस अकाउंट से लगातार भड़काऊ और फर्जी पोस्ट शेयर किए जा रहे थे. पुलिस ने इसके कंटेंट का फैक्ट चेक किया तो कई दावे गलत पाए गए.
एक पोस्ट में दावा किया गया था कि चुनाव के बाद 19 लोगों की मौत हो गई और 98 लोग घायल हुए. लेकिन इस खबर की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली. जांच में इसे पूरी तरह झूठा बताया गया. एक अन्य पोस्ट में कहा गया कि कोलकाता में हिंसा के बाद सेना को तैनात किया गया है. यह खबर भी गलत निकली. ऐसे झूठे दावे जानबूझकर बनाए जाते हैं ताकि लोगों में डर फैलाया जा सके और स्थिति खराब हो.
जांच में यह भी सामने आया कि यह अकाउंट कई महीनों से पाकिस्तान से चलाया जा रहा था. इसे चलाने वाले लोग अपनी पहचान छिपाने के लिए वीपीएन का इस्तेमाल कर रहे थे. इसी अकाउंट से पहले नोएडा के मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान भी फर्जी खबर फैलाई गई थी. उस समय दावा किया गया था कि पुलिस फायरिंग में 14 लोगों की मौत हो गई. बाद में यह खबर भी झूठी साबित हुई. पुलिस ने बताया कि ऐसे कई अकाउंट मिलकर एक नेटवर्क की तरह काम करते हैं. इसलिए जरूरी है कि लोग सोशल मीडिया पर किसी भी खबर को बिना जांचे सच न मानें और जिम्मेदारी के साथ जानकारी शेयर करें.
