शुभेंदु अधिकारी और अभिषेक बनर्जी की दुश्मनी बंगाल की सियासत में किसी से छिपी नहीं है। अभिषेक बनर्जी वही शख्स हैं जिन्होंने कभी शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी से दूर किया था। लेकिन वक्त बदला। अब शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने और बंगाल में बीजेपी सरकार आने के बाद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें हर दिन बढ़ती जा रही हैं, अभिषेक बनर्जी के ऊपर कोयला घोटाले से लेकर कई संगीन और बड़े आरोप हैं। इन मामलों की जांच सीबीआई, ईडी, लोकल पुलिस और दूसरी एजेंसियां कर रही हैं। अभिषेक बनर्जी पर बार-बार आरोप लगता रहा है कि वो TMC के गुंडों को एक्टिव करते हैं। बीजेपी को बंगाल में परेशान करते हैं। बीजेपी कार्यकर्ताओं को मरवाने तक के आरोप अभिषेक बनर्जी पर लग चुके हैं, ऐसे में साफ है कि बीजेपी सरकार अभिषेक बनर्जी को आसानी से छोड़ने वाली नहीं है। एक-एक फाइल खुलेगी। एक-एक भ्रष्टाचार का मामला खोदकर निकाला जाएगा। जो मंत्री भ्रष्टाचार में पकड़े जाएंगे, उनसे भी अभिषेक बनर्जी के राज उगलवाए जाएंगे। हर कड़ी को जोड़ा जाएगा और अब अभिषेक बनर्जी पर एक बार फिर शिकंजा कस गया है। शनिवार को कोलकाता पुलिस और सेंट्रल फोर्स के जवानों की टीम ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित घर पर धावा बोल दिया, देर रात करीब ढाई बजे ये हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हुआ। पुलिस अधिकारियों ने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया। अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। आखिरकार ताला तोड़कर टीम भीतर दाखिल हुई। इस दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों ने पूरे इलाके को घेर रखा था। एक परिंदा भी पर नहीं मार सकता था।

TMC नेता की शिकायत पर हुई कार्रवाई
ये सनसनीखेज कार्रवाई शालबनी के एक स्थानीय तृणमूल नेता की शिकायत पर की गई है। शिकायत में अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक PA सुमित राय पर गंभीर आरोप हैं। आरोप है कि सुमित राय ने टिकट दिलाने के नाम पर वित्तीय धोखाधड़ी की है। लाखों रुपये का लेन-देन हुआ है।
पुलिस ने मोबाइल टावर लोकेशन ट्रैक की। लोकेशन अभिषेक बनर्जी के कालीघाट वाले घर की निकली। इसके बाद तड़के तीन बजे पुलिस टीम घर पहुंची। करीब पांच घंटे तक घर में सघन तलाशी अभियान चलाया गया। एक-एक करके सभी कमरे खंगाले गए। दस्तावेज, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, मोबाइल सब कब्जे में लिए गए।
भागी-भागी पहुंचीं ममता बनर्जी
इस छापेमारी की खबर मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सुबह-सुबह गाड़ी से सीधे अभिषेक के घर पहुंच गईं। ममता के पहुंचते ही सियासी हलचल और तेज हो गई। कालीघाट के बाहर TMC कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी। नारेबाजी शुरू हो गई, तलाशी को लेकर अभिषेक बनर्जी ने गुस्सा जताया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने ताला तोड़कर पूरे घर की तलाशी ली है। हमारे पास इसकी पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग है। हमने जांच में पूरा सहयोग किया है। ये सब राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। हमें टारगेट किया जा रहा है।
चौतरफा घिरे अभिषेक बनर्जी
अभिषेक बनर्जी इस वक्त चारों तरफ से कानूनी मामलों में घिरे हुए हैं। फर्जी हस्ताक्षर मामले में गुरुवार को ही CID ने उनसे साढ़े पांच घंटे तक पूछताछ की थी। CID ने उन्हें रविवार 14 जून को फिर से पेश होने को कहा है, इसके अलावा सोमवार 15 जून को प्राथमिक भर्ती घोटाले में ED ने समन भेजा है। ED का आरोप है कि शिक्षक भर्ती में करोड़ों का घोटाला हुआ और पैसा ऊपर तक पहुंचा। मंगलवार 16 जून को धमकी मामले में CID के सामने पेश होना है, यानी तीन दिन में तीन एजेंसियों के सामने पेशी। और इसी बीच शनिवार तड़के हुई इस औचक छापेमारी ने बंगाल की सियासत का पारा और चढ़ा दिया है। शुभेंदु अधिकारी पहले ही कह चुके हैं कि बंगाल को भ्रष्टाचार मुक्त करेंगे। हर घोटालेबाज जेल जाएगा। अभिषेक बनर्जी उनका सबसे बड़ा टारगेट हैं।
बंगाल में सत्ता बदलते ही अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शुभेंदु अधिकारी और उनके बीच पुरानी दुश्मनी अब कानूनी लड़ाई में बदल गई है। कोयला घोटाला, भर्ती घोटाला, फर्जी हस्ताक्षर केस में अभिषेक लगातार एजेंसियों के रडार पर हैं, कालीघाट वाले घर पर छापा और ममता बनर्जी का दौड़कर पहुंचना बताता है कि मामला गंभीर है। तीन दिन में तीन पेशी और पांच घंटे की घर तलाशी से TMC में हड़कंप है। पार्टी के अंदर भी खलबली मची है, बीजेपी सरकार हर फाइल खोलने के मूड में है, शुभेंदु अधिकारी का साफ संदेश है कि कानून से ऊपर कोई नहीं। जो दोषी है वो बचेगा नहीं, चाहे वो कितना भी बड़ा नेता क्यों न हो। अब एजेंसियों के पास डिजिटल सबूत हैं, दस्तावेज हैं, गवाहों के बयान हैं, अगर PA सुमित राय की कड़ी अभिषेक तक जुड़ती है तो मुश्किल और बढ़ेगी, सवाल ये भी है कि क्या ममता बनर्जी अपने भतीजे को इस कानूनी चक्रव्यूह से निकाल पाएंगी? या फिर शुभेंदु अधिकारी का बदला पूरा होगा? बंगाल की सियासत में अगले कुछ दिन बेहद अहम हैं। अभिषेक बनर्जी के लिए ये करो या मरो की लड़ाई है। एक तरफ जेल का खतरा है, दूसरी तरफ सियासी करियर दांव पर है। अब देखना ये है कि अभिषेक बनर्जी इस चक्रव्यूह से निकल पाते हैं या नहीं।
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