बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी पहले उम्मीदवार बदलने और फिर नीरज कुमार सिन्हा के बायोडाटा विवाद को लेकर विपक्ष के निशाने पर आ गई है।

बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कमाल कर दिया है। और वो भी एक नहीं, दो-दो बार। जिसे राजनीतिक गलियारों में अब ‘बैक-टू-बैक दो ब्लंडर’ कहा जा रहा है, बीजेपी खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट को और इस उपचुनाव को मज़ाक बना लिया है। पहले बीजेपी ने अभिषेक कुमार उर्फ बंटी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया। भारी दलबल के साथ नामांकन भी दाखिल हो गया। फोटो खिंचे, माला पहनी, जश्न मनाया। लेकिन इसके महज 24 घंटे के भीतर ही बीजेपी ने उनका नाम वापस ले लिया। आधिकारिक तौर पर वजह पारिवारिक बताई गई, लेकिन विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और आरजेडी ने तुरंत मोर्चा खोल दिया। उनका आरोप है कि, अभिषेक बंटी के पिता का नाम चारा घोटाले से जुड़ा होने के कारण इतना भारी विवाद शुरू हो गया कि, बीजेपी को ऐन वक्त पर उनका टिकट काटना पड़ा और इसके अलावा एक और वजह मानी जा रही है, सामने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर जैसे मजबूत कैंडिडेट की मौजूदगी। मतलब पहले सर्वे ठीक से नहीं किया, टिकट दे दिया। विवाद हुआ तो घबराकर टिकट काट दिया।
बीजेपी ने कर दी दोबारा गलती
अभिषेक बंटी का नाम वापस होते ही बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति ने आनन-फानन में नए प्रत्याशी का ऐलान कर दिया। नरेंद्र भारती मंडल के अध्यक्ष नीरज कुमार सिन्हा को कैंडिडेट बनाया गया। लेकिन यहीं पर बीजेपी ने दूसरा और उससे भी बड़ा ब्लंडर कर दिया। नीरज कुमार सिन्हा के नाम के ऐलान के साथ ही पार्टी की ओर से जो आधिकारिक प्रोफाइल जारी किया गया, उसमें एक ऐसी तकनीकी गड़बड़ी सामने आ गई कि, सोशल मीडिया पर बीजेपी की किरकिरी शुरू हो गई। जारी किए गए बायोडाटा में नीरज कुमार सिन्हा की डेट आफ बर्थ साल 1994 दर्ज है और उसी प्रोफाइल में उनके बीजेपी जॉइन करने का साल 2006 लिखा हुआ है। मतलब गणित लगाइए। 2006 में अगर नीरज ने बीजेपी जॉइन किया और जन्म 1994 का है, तो उस हिसाब से वो महज 12 साल की उम्र में ही बीजेपी के कार्यकर्ता बन गए थे। 12 साल का बच्चा, पांचवी-छठी में पढ़ने वाला बच्चा और वो बीजेपी जॉइन कर रहा है? सोशल मीडिया पर मीम की बाढ़ आ गई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि, बीजेपी की ये जल्दबाजी और लापरवाही का दूसरा बड़ा सबूत है। विपक्ष कह रहा है कि, प्रशांत किशोर के डर से बीजेपी को उम्मीदवार ही नहीं मिल रहा, जो मिला उसकी उम्र का हिसाब ही गड़बड़ है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट का बना मज़ाक
सबसे बड़ी बात ये है कि, बांकीपुर सीट आम नहीं है। ये बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट है। उनके परिवार की बकौती वाली सीट मानी जाती है। लेकिन बीजेपी ने इस सीट का भी मज़ाक बना दिया है। पहले तो अभिषेक कुमार सिन्हा को टिकट दिया और फिर उनका टिकट काट दिया गया। और अब उनकी जगह दूसरे कैंडिडेट नीरज सिन्हा की प्रोफाइल ही गड़बड़ निकल गई। पता चला कि, 12 साल की उम्र में इन्होंने बीजेपी जॉइन कर लिया था। मतलब ना उम्मीदवार फाइनल है, ना बायोडाटा फाइनल है। बांकीपुर में सीएम सम्राट और बीजेपी की छवि क्या बची होगी, आप खुद सोचिए।
PK के सामने बैकफुट पर बीजेपी
दूसरी तरफ प्रशांत किशोर हैं। पहली बार खुद चुनाव लड़ रहे हैं। पूरा बांकीपुर घूम रहे हैं। जातिगत समीकरण, लोगों का मूड सब भांप चुके हैं और बीजेपी यहां टिकट देने में दो बार गलती कर चुकी है। एक बार विवाद के डर से टिकट काटा। दूसरी बार बिना चेक किए प्रोफाइल जारी कर दी। अब जनता क्या सोचेगी? कि पार्टी इतनी सीरियस है इस उपचुनाव को लेकर? क्या बीजेपी के पास बांकीपुर के लिए कोई ठोस उम्मीदवार ही नहीं है? क्या केंद्रीय चुनाव समिति बिना वेरिफाई किए नाम पास कर रही है? और राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट पर ये हाल है तो बाकी जगह क्या होगा?
बीजेपी ने बांकीपुर उपचुनाव को खुद ही हल्का बना दिया है। पहले उम्मीदवार बदला, फिर उम्मीदवार का डेटा ही गलत निकला। अब देखना होगा कि सीएम सम्राट इस किरकिरी को कैसे संभालती है और क्या नीरज सिन्हा इस बायोडाटा विवाद के बाद भी चुनाव लड़ पाएंगे, या फिर पार्टी फिर किसी तीसरे कैंडिडेट की तलाश करेगी।
आपको क्या लगता है, बीजेपी की ये गलतियां बांकीपुर में भारी पड़ेंगी या नहीं?
