कॉकरोच जनता पार्टी की मांगे आखिरकार खत्म हो गई. सरकार आखिरकार Gen-z के आगे झुक चुकी है. दरअसल, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है. धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है. उन्होंने बताया की वह अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज चुके है.
एक्स पर पोस्ट कर दी जानकारी
साथ ही उन्होने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि ‘मैंने पहले दिन से ही इसकी जिम्मेदारी ली है और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा. पिछले 10 दिन का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुखी है. यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. प्रधान ने कहा कि जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, उसका राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे. मैं पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं. मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है. मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं. भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है. आदरणीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं.
कई दिनों से हो रहा प्रोटेस्ट क्या होगा खत्म
बता दे कि जंतर-मंतर पर 20 जुलाई के दिन संसद मार्च के दौरान हुए हंगामे के बाद से माहौल और गरमाते जा रहा था. प्रदर्शन धीरे-धीरे आक्रामक रूप ले रहा था. कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस की लाठीचार्ज की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ा. तो वहीं, कई पुलिस वाले प्रदर्शनकारियों द्वारा किए जा रहे पथराव की वजह से घायल हुए थे. कॉकरोच जनता की तीनों मांगो को स्वीकार किया जा चुका है. हालांकि, सीजेपी की ये भी मांग थी कि सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाया जाए. अब देखना यह है कि आगे क्या होता है.
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