उत्तराखंड में वन विभाग की ओर से एक बड़ा फैसला लिया है. दरअसल, मानव वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए वन विभाग ने 13 गुलदार और 3 भालुओं को मारने की सहमति दे दी है. बता दें कि यह वन्यजीव लगातार मानव आबादी में आकर इंसानों पर हमला कर रहे हैं. साथ ही उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं. बार-बार ऐसी घटना के आने के कारण वन विभाग ने यह फैसला लिया है.
वन विभाग की दी जानकारी के मुताबिक, वह बार-बार इन्हें पकड़ने की कोशिश कर रहा है. लगातार इन कोशिशों के विफल होने के बाद में यह आदेश जारी किया गया है. सूचना के अनुसार राज्य में अभी भी 118 ऐसे मामले हैं , जिसमें 90 गुलदार, 21 बाघ और 8 भालुओं को मारने के लिए टीम तैनात किया गया है.
क्या है वन्यजीव संरक्षण अधिनियम
दरअसल, इस अधिनियम के तहत किसी भी वन्यजीव को सीधा नहीं मारा जा सकता है. उसके लिए पहले ट्रैंक्युलाइज़ कर जंगल में छोड़ने की कोशिश की जाती है, लेकिन अगर वह फिर भी नहीं पकड़ पाते हैं और वह मानव जीवन के लिए खतरा बनता है, तब उसे उसे मारने की अनुमति दे दी जाती है. जानवर को मारने की अनुमति वन्यजीव प्रतिपालक के मुताबिक दी जाती है.
कितने लोगों अभी तक मारे गए?
अगर आंकड़ों की बात करें, तो पिछले एक दशक में अभी तक 327 लोग अपनी जान गंवा खो बैठे हैं. सबसे ज्यादा मौतें गुलदारों के हमले से हुई है. जंगलों में इनकी बढ़ती आबादी इस संघर्ष का कारण है. हालांकि, यह अचानक से ही नहीं बढ़ा है. ये सैकड़ों सालों से चला आ रहा है.
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