Bangladesh minority violence Sheikh Hasina: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई है और भारत से लोकतांत्रिक सिद्धांतों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के संरक्षण की अपील की है.

Bangladesh minority violence Sheikh Hasina: बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हाल ही में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि मुल्क में धार्मिक कट्टरपंथ और भीड़ की मानसिकता के कारण कई हिंसक घटनाएं हुई हैं, जिनमें दीपू दास की हत्या जैसी घटनाएं शामिल हैं. शेख हसीना का मानना है कि यह अकेली घटना नहीं है और हाल के समय में हजारों अल्पसंख्यक ईसाई, हिंदू, बौद्ध और अहमदिया मुसलमानों को निशाना बनाया गया है.
कट्टरपंथी विचारधारा को दे रहे हैं बढ़ावा
उन्होंने बताया कि मंदिर, चर्च और मस्जिदों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और रीति-रिवाज पर भी रोक लगाई जा रही है. महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से दूर रखा जा रहा है और इस सब को कट्टरपंथी विचारधारा के नाम पर सही ठहराया जा रहा है. शेख हसीना ने कहा कि ऐसी हिंसा केवल लोकतांत्रिक और मजबूत नेतृत्व के जरिए रोकी जा सकती है, जो कट्टरपंथ के खिलाफ साफ रुख अपनाए और अल्पसंख्यकों को बराबरी का अधिकार दे.
अपनी बात में उन्होंने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत हमेशा बांग्लादेश का भरोसेमंद पड़ोसी रहा है और इस समर्थन की सराहना की जाती है. उन्होंने भारत से अपील की कि वह बांग्लादेश में लोकतांत्रिक सिद्धांतों, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और क्षेत्रीय शांति के लिए अडिग रहे. उनका कहना है कि एक स्थिर और लोकतांत्रिक बांग्लादेश न सिर्फ वहां, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए मददगार होगा.
हिंदू समुदाय के सात लोगों की मौत

बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद के अनुसार, दिसंबर से अब तक हिंदू समुदाय के सात लोग मारे गए हैं. हालांकि, परिषद ने दो मामलों के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी है. यह घटनाएं शेख हसीना की सरकार के अपदस्थ होने के बाद तेज हुई हैं और अल्पसंख्यक समुदायों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है.
2022 की जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश में लगभग 1.31 करोड़ हिंदू रहते हैं, जो कुल आबादी का करीब 7.95 प्रतिशत हैं. शेख हसीना का मानना है कि अगर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित किए जाएं, तो ही बांग्लादेश में शांति और लोकतंत्र कायम रह सकता है.
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