Stray dogs Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर सुनवाई के दौरान कहा कि किसी जानवर के व्यवहार का पहले से अंदाजा लगाना मुश्किल है और लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है. अदालत ने स्कूल, अस्पताल और अदालत जैसी जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने पर जोर देते हुए स्थायी समाधान की जरूरत बताई है.

Stray dogs Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़ी बढ़ती घटनाओं को लेकर बुधवार को अहम सुनवाई हुई है. इस दौरान अदालत ने साफ कहा कि किसी भी जानवर के व्यवहार को पहले से समझ पाना आसान नहीं होता है. अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि स्कूल, अस्पताल और अदालत जैसे संवेदनशील स्थानों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी क्यों होनी चाहिए और अगर इन्हें वहां से हटाया जाता है तो उस पर आपत्ति किस बात की है. कोर्ट का मानना है कि लोगों की सुरक्षा सबसे अहम है और इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है.
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि कोई यह नहीं बता सकता कि कोई कुत्ता कब काटने के मूड में आ जाएगा. पीठ ने यह भी कहा कि इलाज से बेहतर रोकथाम होती है. अदालत ने चिंता जताई कि अचानक होने वाले हमलों से बच्चों, बुजुर्गों और आम लोगों की जान खतरे में पड़ जाती है, इसलिए सिर्फ घटनाओं के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से समाधान तलाशना जरूरी है.
कुत्ते को ले जाकर नसबंदी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अपनी दलील रखी थी. उन्होंने कहा कि जैसे राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को इस मामले में शामिल किया गया है, वैसे ही रेल मंत्रालय को भी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए. सिब्बल ने बताया कि अगर कोई कुत्ता आक्रामक हो और किसी को नुकसान पहुंचा सकता है, तो लोग संबंधित सेंटर को सूचना दे सकते हैं. वहां कुत्ते को ले जाकर नसबंदी की जाती है और बाद में उसे वापस उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है.
सड़क हादसे के हो सकते हैं शिकार

इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि फिर तो सिर्फ एक ही बात बचती है कि कुत्ते की काउंसलिंग की जाए, ताकि वह दोबारा किसी को नुकसान न पहुंचाए. उन्होंने यह भी कहा कि समस्या सिर्फ काटने तक सीमित नहीं है. कई बार कुत्ते दोपहिया वाहनों और साइकिलों के पीछे दौड़ते हैं, जिससे सड़क हादसे हो सकते हैं. इस पर कपिल सिब्बल ने जवाब दिया कि ऐसा कुछ इलाकों में होता है, लेकिन सभी कुत्तों का व्यवहार एक जैसा नहीं होता है.
इसके बाद अदालत ने सवाल किया कि सुबह के समय कोई कैसे तय करेगा कि कौन सा कुत्ता किस मूड में है. जब सिब्बल ने पूछा कि क्या सभी कुत्तों को शेल्टर में रखना ही एकमात्र समाधान है, तो कोर्ट ने साफ किया कि वह ऐसा नहीं कह रही है. अदालत ने कहा कि कुत्तों का हर जगह सड़कों पर होना भी सही नहीं है. कोर्ट ने माना कि इन घटनाओं की जानकारी उसे है और अब समय आ गया है कि ऐसा स्थायी और व्यावहारिक समाधान निकाला जाए, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी.
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