Indian stock market declines: डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और रूस से तेल आयात को लेकर दिए गए बयानों से भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे दिन गिरावट में रहा, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है.
Indian stock market declines: भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ गई है. गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही भारी दबाव में रहे हैं. चार कारोबारी दिनों में बीएसई में कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 7.19 लाख करोड़ रुपये घट गया है. इस दौरान सेंसेक्स लगभग 1,442 अंक और निफ्टी करीब 405 अंक टूट चुका है. गुरुवार को सेंसेक्स 824 अंक गिरकर 84,136 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 273 अंक फिसलकर 25867 पर आ गया है.
ट्रंप ने दिए संकेत…
इस गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी बयानबाजी मानी जा रही है. ट्रंप ने रूस से आयात होने वाले सामान पर बहुत अधिक टैरिफ लगाने वाले एक प्रस्ताव का समर्थन किया है. इस कदम का मकसद उन देशों पर दबाव बनाना बताया जा रहा है, जो सस्ते रूसी तेल की खरीद कर रहे हैं. भारत भी इसमें शामिल है. भले ही यह प्रस्ताव अभी कानून न बना हो, लेकिन अगले हफ्ते इस पर वोटिंग की संभावना ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है. ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगर भारत ने रूसी तेल को लेकर अमेरिकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया, तो भारतीय सामान पर और ज्यादा शुल्क लगाया जा सकता है.
ट्रंप के भारत-अमेरिका व्यापार को लेकर दिए गए बयानों ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि टैरिफ को लेकर भारत असहज है. इन टिप्पणियों से यह संकेत मिला कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर बाजार पर पड़ा है.
घरेलू मोर्चे पर बड़े शेयरों में बिकवाली ने गिरावट को और तेज कर दिया है. रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में करीब एक प्रतिशत तक की गिरावट आई है. मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा और इसके सभी शेयर लाल निशान में बंद हुए हैं. आईटी शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों की चाल पूरे बाजार की दिशा तय कर रही है.
दुनिया में अभी माहौल अनुकूल नहीं है. वेनेजुएला में राजनीतिक घटनाक्रम और एशियाई बाजारों की कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है. जापान, चीन और अन्य एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई है. निवेशक अब अमेरिका की रोजगार रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आगे की ब्याज दर नीति को लेकर संकेत मिल सके हैं. कुल मिलाकर, वैश्विक अनिश्चितता और घरेलू बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा है.
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