America uk dispute: डिएगो गार्सिया को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन में विवाद बढ़ गया है, ट्रंप ने UK की योजना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया. भारत ने चागोस संधि में समर्थन देकर कनफर्म किया कि अमेरिकी बेस लगातार काम करता रहे.

America uk dispute: अमेरिका और ब्रिटेन के बीच हिंद महासागर के डिएगो गार्सिया द्वीप को लेकर नया विवाद सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन को निशाना बनाते हुए कहा कि यह फैसला अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि UK का यह कदम चीन और रूस के नजर में कमजोरी के रूप में दिखेगा. ट्रंप ने इसे बड़ी बेवकूफी करार दिया और ग्रीनलैंड को हासिल करने की अपनी योजना से जोड़कर इसे सही ठहराया है.
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित है और पूर्वी अफ्रीका के तट से करीब 3,200 किलोमीटर दूर है. यह द्वीप दशकों से अमेरिका और ब्रिटेन के मिलिट्री बेस के रूप में इस्तेमाल हो रहा है. इस बेस से अमेरिका मिडिल ईस्ट और एशिया में अपने मिशन संचालित करता है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इस द्वीप को मॉरीशस को लौटाने और बेस को लीज पर देने के लिए पिछले साल एक डील की थी, जिसे ट्रंप ने पहले समर्थन दिया था, लेकिन अब उन्होंने इसकी आलोचना की है.
ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि UK का यह कदम अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा पैदा कर रहा है. उनका कहना था कि डेनमार्क और यूरोपीय सहयोगियों को सही कदम उठाना चाहिए. उन्होंने इस मुद्दे को चीन और रूस की नजरों में अमेरिका की कमजोरी के रूप में बताया. रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने भी चिंता जताई कि इस डील से चीन हिंद महासागर में अमेरिकी गतिविधियों पर नजर रख सकता है.
भारत के लिए भी डिएगो गार्सिया का महत्व खास है. यह भारत के दक्षिणी तट से मात्र 1,800 किलोमीटर दूर है और चागोस द्वीपसमूह का हिस्सा है. भारत ने ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच 22 मई 2025 को हुई चागोस संधि पर हस्ताक्षर का समर्थन किया. यह सुनिश्चित करता है कि मॉरीशस को संप्रभुता लौटने के बाद भी अमेरिकी बेस लगातार काम करता रहे. भारत ने इस समझौते में अहम भूमिका निभाई, जिससे क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा बनाए रखी जा सके.

कुल मिलाकर, डिएगो गार्सिया को लेकर अमेरिका, ब्रिटेन, मॉरीशस और भारत के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं. ट्रंप की आलोचना और अमेरिकी सुरक्षा के मुद्दे इस विवाद को और गंभीर बना रहे हैं. यह द्वीप न केवल सैन्य रणनीति बल्कि वैश्विक राजनीतिक संतुलन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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