LED Bulb emit UV radiation: आज के समय में सभी लोग अपनी स्किन को लेकर काफी सचेत रहते हैं. इसी कारण से वह जब भी बाहर जाते हैं. तो सनस्क्रीन जरूर लगा कर जाते हैं. ऐसे में एक बात लोगों के बीच चर्चे में आ रही है. दरअसल, लोग बाहर धूप से बचने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल तो कर लेते हैं लेकिन हाल ही में लोगों के बीच LED बल्ब से भी हानिकारक किरणों के निकलने की बात सामने आ रही है. आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे हैं कि क्या यह बात सच है या झूठ.
कई लोगों का कहना हैं कि अल्ट्रावॉयलेट किरण जो की सूरज से निकलती है. वहीं, किरणें LED बल्ब से भी निकल रही है. हालांकि, इससे पहले यह जानने की जरूरत है कि आखिर कितने तरीकों की तरंगे होती है. जो हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाने का काम करती है.
कितने तरीके की होती है यूवी रेडिएशन?
बता दें कि यूवी रेडिएशन तीन तरीके की होती है. सबसे पहली और सबसे लंबी किरण UVa होती है. यह भी त्वचा को नुकसान पहुंचाती है. हालांकि, यह उतना नुकसान नहीं पहुंचा पाती है. ज्यादा दिन तक इसका एक्सपोजर रहने से आप की त्वचा जल्दी बूढ़ें होने की निशानी दिखाने लगती है.
इसके बाद आती है यूवीबी तरंगें. यह मध्यम रेंज की तरंग होती है. इन्हीं के ,ज्यादा देर तक एक्सपोजर रहने से व्यक्ति को सनबर्न जैसे गंभीर स्किन डैमेज को झेलना पड़ता है.
इसके बाद आती है सबसे छोटी रेंज की पर सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाली तरंग. यह है यूवीसी. जितनी इसकी रेंज कम उससे ज्यादा यह खतरनाक. कई रिसर्च का यह मानना है कि अगर इन किरणों के संपर्क व्यक्ति ज्यादा दिन तक रहता है. तो उसकी स्कीन ज्यादा तेजी से बूढ़ी होती है. साथ ही उनकी आंखों को भी काफी नुकसान पहुंचता है. इन्हीं कारणों की वजह से लोगों में LED बल्ब से निकलने वाली किरणों के बारे में चिंता करना स्वाभाविक है.
क्या सच में निकलती हैं इनमें से ऐसी किरण
दरअसल, उनमें निकलने वाली किरणें इतनी कम मात्रा में निकलती है कि वह हमारे स्कीन तक पहुंचने से पहले ही खत्म हो जाती हैं. एलईडी में फॉस्फर की चिप से 1 प्रतिशत से भी कम यूवी किरणों का उत्सर्जन होता है. जानकारी के अनुसार घरों में लगने वाले बल्ब इस तरह से बनाए ही नहीं जाते हैं कि वह हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सके. इनमें से निकलने वाली किरण का स्तर धूप की तुलना में काफी कम होता है.
इन बल्बों को न लगाए घर पर
बता दें कि कुछ LED Bulb ऐसे होते जिन्हें जान कर ऐसा बनाया जाता है. स्टरलाइजेशन, इंडस्ट्रियल इस्तेमाल वाले यूवी और नेल क्योरिंग ये ऐसी लाइट होती है कि इनमें से निकलने वाली यूवी रेज आपकी स्कीन को आसानी से नुकसान पहुंचा सकती है. इनको इसी तरीके से डिजाइन किया जाता है. आसान भाषा में कहा जाएं तो घरों में लगने वाली लाइटों में यूवी रेंज की मात्रा इतनी ज्यादा कम होती है कि इनसे आंखों के साथ-साथ शरीर को भी इतना नुकसान नहीं पहुंच पाता है.
ये भी पढ़ें: केदारनाथ धाम में भारी बर्फबारी, नजारे देख उत्साह से भर गए भक्त, पूरे क्षेत्र ने ओढ़ी सफेद चादर
यहां पर दी गई जानकारी विशेषज्ञ और रिसर्च पर है. किसी भी चीज की सलाह लेने से पहले डॉक्टरों की सलाह लें. इसको मेडिकल सलाह के रूप में न लें.
