बीते सालों से विमान हादसों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखी गई है. कई लोगों को लगता है कि विमान में तकनीकी खराबी के कारण या पायलट की गलती के कारण ऐसा होता है. हालांकि, ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है. इनके अलावा भी अन्य कई कारण होते हैं, जिसके कारण विमान हादसे होते हैं. बहुत केस में इसे रहस्य से भी जोड़कर देखा जाता है लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता है. आइए जानते हैं.
ट्रांसपोंडर का फेल हो जाना
विमान को ट्रैक करने के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल 2 तरीके के रडार का उपयोग करता है. प्राइमरी रडार वह होता है जो प्लेन से टकरा कर सिग्नल आता है. वह उसका लोकेशन बताने में मदद करता है. वही, सेकेंडरी रडार वह होता है जो प्लेन में ही लगे ट्रांसपोंडर से सिग्नल देता है. ज्यादातर केसों में ट्रांसपोंडर अगर कार्य करना बंद कर दे तो प्लेन सेकेंडरी वाले रडार से गायब हो जाता है. बता दें कि विमान का ट्रांसपोंडर उस प्लेन की पहचान उसकी ऊंचाई और स्पीड जैसी चीजें कंट्रोल रूम को देता है. किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी होने पर यह खराब हो जाता है, जिसके कारण प्लेन के हवा में मौजूद होने के बावजूद भी वह रेडार से गायब होता है.
मौसम में गड़बड़ी
हालांकि, तकनीकी खराबी के अलावा मौसम भी इसकी वजह हो जाता है. अगर काफी ज्यादा भयावह तूफान, बारिश, बिजली या सोलर गतिविधियां होती है. तो ऐसे में सिग्नल बिगड़ जाता है. बता दें कि भौगोलिक कारण से भी रडार कमजोर होता है. जब प्लेन समुद्र के ऊपर होता है. तब ऐसा होता है.
नेविगेशन सिस्टम भी होता है इसका कारण
कई बार प्लेन नेविगेशन सिस्टम में गलत डेटा देता है. इसकी वजह से पायलट को विमान की दिशा और उसकी ऊंचाई का भी पता नहीं लग पाता है. इन्हीं कारणों से गलत सेंसर रीडिंग पायलट को मिलती है, जिसकी वजह से वह गलत फैसले ले लेता है और हादसा हो जाता है. हालांकि, कुछ केस में इंसानी गलती और जान करके सिस्टम बंद कर दिया जाता है. इसके कारण प्लेन रडार से गायब हो जाता है. आज के समय में तकनीक इतनी ज्यादा आगे बढ़ गई है कि ऐसे असामान्य गतिविधियों की तुरंत जानकारी मिल जाती.
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