जोधपुर पुलिस ने जांच पड़ताल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल रिपोर्ट से साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के कारणों को साफ कर दिया है. पुलिस ने उनकी मौत का कारण कार्डियक और पल्मोनरी अरेस्ट को बताया है.
राजस्थान पुलिस ने साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के कारणों के पीछे की जांच करते हुए अब मौत की असली वजह सामने ला दी है. जोधपुर पुलिस ने जांच पड़ताल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) रिपोर्ट से उनकी मौत के कारणों को साफ कर दिया है. पुलिस ने मुताबिक प्रेम बाईसा की मौत कार्डियक और पल्मोनरी अरेस्ट के कारण हुई है.
पुलिस की जांच के दौरान इंजेक्शन लगाने वाले नर्सिंगकर्मी की भूमिका के ऊपर भी सवाल उठ रहे हैं. जोधपुर पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश पासवान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) रिपोर्ट और हिस्टोपैथोलॉजी जांच के आधार पर साफ हुआ है कि साध्वी प्रेम बाईसा की मौत किसी साजिश या बाहरी चोट के कारण से नहीं हुई थी.
पासवान ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में यह सामने आया है कि वे काफी समय से अस्थमा और फेफड़ों की बीमारी की शिकार थीं. इन्हीं बीमारियों के कारण उन्हें कार्डियक और पल्मोनरी अरेस्ट आया, जिससे उनकी मौत हो गई. हालांकि पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि नर्सिंगकर्मी द्वारा जो इंजेक्शन उन्हें लगाया गया था, उसमें भी लापरवाही बरती गई थी.
पुलिस के मुताबिक साध्वी को जो भी इंजेक्शन लगाए गए थे, वे सभी शेड्यूल-एच कैटेगरी दवाइयां थीं. जानकारी के मुताबिक इस तरह की दवाइयों को बिना ऑथोराइज्ड पर्ची के लगाए जाने पर रोक होती है. पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि नर्सिंगकर्मी देवी सिंह खुद से इंजेक्शन लेकर आया था. जिसके बाद उस अभी तक उस इंजेक्शन की वैध पर्ची पुलिस को नहीं मिली है.
जब पुलिस कमिश्नर से पूछा गया कि क्या साध्वी को इंजेक्शन के कारण कार्डियक अरेस्ट आया, तो उन्होंने बताया कि इस मामले में अभी लास्ट फैसले के लिए मेडिकल बोर्ड के ओपनियन का इंतजार करना पड़ रहा है. हालांकि उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल रिपोर्ट से साफ हो गया है कि उनकी मौत किसी भी आपराधिक हमले या फिर साजिश के कारण नहीं हुई है. उन्होंने बताया है कि एक्सपर्ट से ओपिनियन मिलने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इंजेक्शन का असर किस हद तक मौत के लिए जिम्मेदार था.
प्रेम बाईसा की मौत को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन हुआ था. जिसके बाद SIT ने इस मामले में लगभग 44 लोगों से पूछताछ की है. इसके साथ ही मामले में 106 मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की भी जांच की गई. लोगों से पूछताछ और सीडीआर के बाद 37 सैंपल को एफएसएल में जांच के लिए भेजा गया. पुलिस ने बताया कि जांच को पूरी गंभीरता के साथ में किया गया है.
इस मामले में जांच के दौरान साध्वी के पिता को लेकर भी कई सवाल उठ रहे थे, लेकिन पुलिस कमिश्नर का यह कहना है कि पिता ने मौत के बाद में लोगों को इकट्ठा करने के लिए भावनात्मक स्थिति में फोन कॉल किए थे. मामले की जांच में उनकी किसी भी तरह की आपराधिक भागीदारी सामने नहीं आई है. कमिश्नर ने बताया कि साध्वी के नाम से न्याय वाला मैसेज भी उनके पिता ने ही लिखवाया था. जिससे लोगों को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सूचना दी जा सके.
फिलहाल इस मामले में नर्सिंगकर्मी देवी सिंह की भूमिका को लेकर पुलिस ने कार्रवाई के विकल्पों को खोलकर रखा हुआ है. पुलिस कमिश्नर का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट में इंजेक्शन की लापरवाही की पुष्टि हो जाती है, तो कार्रवाई की जाएगी. लगभग 18 दिनों से लगातार यह मामला देश में चर्चा का विषय बना हुआ है. सोशल मीडिया के ऊपर कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं, लेकिन पुलिस जांच ने सभी चीजों को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है.
इस मामले को लेकर पुलिस का कहना है कि जांच को अभी तक पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है. पुलिस ने बताया कि विशेषज्ञों की राय आने के बाद में इस मामले में जरूरी कानूनी कदम उठाए जाएंगे. हालांकि अब जांच के बाद यह साफ हो गया है कि साध्वी प्रेम बाईसा की मौत किसी साजिश को लेकर नहीं बल्कि बीमारी के कारणों से हुई थी. पुलिस का कहना है कि साध्वी द्वारा पहले दर्ज कराए गए दूसरे मामलों में जुड़े हुए भी किसी व्यक्ति की कोई भूमिका सामने नहीं आई है. जांच को गंभीरता से करने के बाद में उनकी मौत के पीछे के कारण कार्डियक और पल्मोनरी अरेस्ट को माना गया है.
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