israel iran war impact on indian companies: ईरान-इजरायल युद्ध ने अडानी, टाटा और सन फार्मा जैसी दिग्गज भारतीय कंपनियों के अरबों डॉलर के निवेश को खतरे में डाल दिया है. सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर इस तनाव का गहरा असर दिखने की आशंका है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं.

israel iran war impact on indian companies: इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग में अब संयुक्त राज्य अमेरिका खुलकर इजरायल के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है. दूसरी ओर ईरान अकेले मोर्चा संभाल रहा है. जंग तेज होने से पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है. अब यह चर्चा भी तेज है कि रूस और चीन आगे क्या रुख अपनाते हैं. आर्थिक नजरिये से यह टकराव दुनिया के लिए और मुश्किलें खड़ी कर सकता है. क्योंकि सबसे बड़ी ताकत माने जाने वाला अमेरिका खुद इस संघर्ष में उतर चुका है. इसका असर सीधे वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है. भारत के लिए भी यह हालात चिंता बढ़ाने वाले हैं. वजह यह है कि कई बड़ी भारतीय कंपनियों का इजरायल में सीधा कारोबार जुड़ा हुआ है. अगर हमले और बढ़ते हैं तो इन कंपनियों के प्रोजेक्ट और कामकाज पर असर पड़ सकता है.
भारत और इजरायल के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल दौरे से लौटे थे. दोनों देशों के बीच कई समझौते भी हुए थे. आज की स्थिति यह है कि भारत में 500 से ज्यादा इजरायली कंपनियां काम कर रही हैं. वहीं कई भारतीय कंपनियों की इज़रायल में मौजूदगी है. जंग के माहौल में सबसे ज्यादा चिंता उन भारतीय कंपनियों को लेकर है जिनका वहां सीधा निवेश है. निवेश और कर्मचारियों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है. शेयर बाजार में भी इस टकराव का असर दिख सकता है. सोमवार को भारतीय बाजारों पर दबाव बनने की आशंका जताई जा रही है.
इजरायल में सबसे बड़ा भारतीय निवेश अडानी ग्रुप से जुड़ा है. उसकी कंपनी Adani Ports and SEZ ने साल 2022 में हाइफा पोर्ट के निजीकरण का टेंडर जीता था. इस सौदे की कीमत करीब 1.8 अरब डॉलर थी. इस परियोजना में अडानी की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत है. इससे पहले इजरायल और हमास के संघर्ष के समय भी कंपनी के शेयरों पर दबाव देखा गया था. फार्मा सेक्टर में Sun Pharma का इजरायल से गहरा जुड़ाव है. वह वहां की दवा कंपनी Taro Pharmaceutical Industries में बड़ी हिस्सेदारी रखती है. इसके अलावा Dr. Reddy’s Laboratories और Lupin Limited जैसी कंपनियों का भी वहां कारोबार है.
आईटी सेक्टर की बड़ी भारतीय कंपनियां भी इज़रायल में काम कर रही हैं. इनमें Tata Consultancy Services, Infosys, Tech Mahindra और Wipro शामिल हैं. टीसीएस के वहां करीब एक हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं. इंजीनियरिंग और रिसर्च सेवाओं में Larsen & Toubro की भी मौजूदगी है. ऊर्जा और तकनीक क्षेत्र में Indian Oil Corporation इज़रायल के साथ साझेदारी कर रही है. बैंकिंग क्षेत्र में State Bank of India की भी वहां उपस्थिति बताई जाती है. जंग लंबी चली तो बैंकिंग और ज्वेलरी कारोबार पर भी असर पड़ सकता है.
व्यापार के आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और इज़रायल के बीच कुल कारोबार करीब 3.6 से 3.7 अरब डॉलर रहा. यह पिछले वर्षों के मुकाबले कम है. भारत ने इजरायल को लगभग 2.1 अरब डॉलर का निर्यात किया. इसमें हीरे और कीमती रत्न, पेट्रोलियम उत्पाद, मशीनरी, रसायन और कृषि सामान शामिल रहे. वहीं इज़रायल से भारत का आयात करीब 1.5 अरब डॉलर रहा. इसमें उर्वरक, रक्षा उपकरण, हाईटेक मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक सामान प्रमुख रहे. साल 2022-23 में दोनों देशों का व्यापार रिकॉर्ड 10.7 अरब डॉलर तक पहुंचा था. लेकिन 2023-24 में यह घटकर करीब 6.5 अरब डॉलर रह गया. सुरक्षा हालात और वैश्विक मंदी इसकी बड़ी वजह मानी गई. इसके बावजूद भारत का व्यापार संतुलन इजरायल के साथ सकारात्मक बना हुआ है. रक्षा. साइबर सुरक्षा. कृषि तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में इज़रायल भारत का अहम साझेदार बना हुआ है.
