donald trump strait of hormuz: होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल सप्लाई बहाल करने के लिए ट्रंप ने सहयोगियों से युद्धपोत मांगे थे, लेकिन जर्मनी और जापान जैसे देशों के इनकार के बाद ट्रंप ने अकेले मोर्चा संभालने का ऐलान किया है. इस कूटनीतिक दरार ने वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा परिदृश्य में भारी तनाव पैदा कर दिया है.

donald trump strait of hormuz: मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण दुनिया भर में तनाव बढ़ गया है. खास तौर पर Strait of Hormuz को लेकर चिंता बहुत ज्यादा बढ़ गई है. यह समुद्री रास्ता तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है. ईरान के नियंत्रण के चलते यहां आवाजाही प्रभावित हुई है. इससे कई देशों में तेल की किल्लत और कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.
इस स्थिति से निपटने के लिए Donald Trump ने अपने सहयोगी देशों से मदद मांगी थी. उन्होंने जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया और स्पेन जैसे देशों से कहा था कि वे अपने युद्धपोत भेजें. लेकिन कई देशों ने इस पर साफ इनकार कर दिया. कुछ देशों ने कोई जवाब ही नहीं दिया. इससे अमेरिका को झटका लगा.
इसके बाद ट्रंप ने अपनी नाराजगी खुलकर जताई. उन्होंने कहा कि अमेरिका को किसी की जरूरत नहीं है. उनका कहना था कि उनका देश दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है. इसलिए वह अपने दम पर हालात संभाल सकता है.
ट्रंप ने सहयोगी देशों पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि नाटो जैसे गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद साथ नहीं दिया जा रहा. उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह का रवैया भविष्य में ठीक नहीं रहेगा. दूसरी ओर, जर्मनी समेत कई देशों का कहना था कि उन्हें इस कार्रवाई के लिए अंतरराष्ट्रीय मंजूरी नहीं मिली थी. इसलिए वे इसमें शामिल नहीं हो सकते.
बताया जा रहा है कि ट्रंप का यह कदम एक तरह से सहयोगियों की परीक्षा भी था. वे देखना चाहते थे कि मुश्किल समय में कौन उनके साथ खड़ा होता है. इस बीच होर्मुज क्षेत्र में तनाव बना हुआ है. तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है. इससे दुनियाभर में आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है. आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं.
