us iran war economic impact: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के कारण वैश्विक बाज़ार में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे अमेरिका में पेट्रोल-डीजल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. इस संकट का असर अमेजन जैसी कंपनियों और एयरलाइंस की सेवाओं पर भी दिख रहा है, जहां फ्यूल सरचार्ज के रूप में आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है.

us iran war economic impact: United States और Iran के बीच चल रही जंग का असर अब पूरी दुनिया के साथ-साथ खुद अमेरिका पर भी साफ दिखने लगा है. इस संघर्ष ने ग्लोबल बाजार में हलचल बढ़ा दी है. सबसे ज्यादा असर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ा है. इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है. महंगाई तेजी से बढ़ रही है. इसी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की चिंता भी बढ़ गई है.
अमेरिका में अब रोजमर्रा की चीजें महंगी होती जा रही हैं. पेट्रोल की कीमत तेजी से बढ़ी है. हालात यह हैं कि पेट्रोल का औसत दाम करीब 4.09 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गया है. यह पहले से काफी ज्यादा है. वहीं डीजल की कीमत भी बढ़कर 5.53 डॉलर प्रति गैलन हो गई है. डीजल महंगा होने का असर खेती, उद्योग और ट्रांसपोर्ट पर पड़ता है. जब ट्रांसपोर्ट महंगा होता है, तो सामान भी महंगा हो जाता है. इसका बोझ सीधे आम जनता पर पड़ता है.
महंगाई का असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं है. बड़ी कंपनियां भी अब कीमतें बढ़ाने लगी हैं. Amazon ने अपनी डिलीवरी पर फ्यूल सरचार्ज लगाने का फैसला किया है. एयरलाइंस कंपनियों ने भी चेक-इन बैगेज की फीस बढ़ा दी है. वहीं United States Postal Service भी डिलीवरी पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है. इससे साफ है कि हर सेक्टर में महंगाई का असर दिख रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह असर आगे और बढ़ सकता है. उनका कहना है कि यह एक ग्लोबल बाजार है. अगर तेल महंगा होता है, तो कोई भी देश इससे बच नहीं सकता. ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ने से हर चीज की कीमत पर असर पड़ता है. सप्लाई चेन भी प्रभावित होती है. अगर युद्ध लंबा चला, तो हालात और खराब हो सकते हैं. इससे आम लोगों के खर्च में और बढ़ोतरी होगी.
इस पूरे संकट की जड़ Strait of Hormuz है, जिसे ईरान ने बंद कर दिया है. यह दुनिया का अहम तेल मार्ग है. इसके बंद होने से तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है. एशिया और यूरोप में भी इसके कारण परेशानी बढ़ गई है. कई देशों को ऊर्जा बचाने के कदम उठाने पड़ रहे हैं. ऐसे में साफ है कि यह जंग सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं है. इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है और आने वाले समय में हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं.
