us navy blockade iran oil tankers: अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के कारण ईरान का करीब 6.9 करोड़ बैरल कच्चा तेल 41 टैंकरों में समुद्र के बीच फंसा हुआ है, जिससे उसके निर्यात में 80% तक की भारी गिरावट आई है. इस स्थिति ने न केवल ईरान और उसके सबसे बड़े खरीदार चीन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण पूरी दुनिया के तेल बाजार में कीमतों में भारी उछाल ला दिया है.

us navy blockade iran oil tankers: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब तेल कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल समुद्र में ही फंसा हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक इस समय करीब 41 तेल टैंकर समुद्र में खड़े हैं और आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. इन टैंकरों में लगभग 6.9 करोड़ बैरल कच्चा तेल भरा हुआ है. अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कड़ी निगरानी कर रही है. इसी वजह से कई ईरानी जहाज दूसरे देशों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.
इस नाकेबंदी के कारण ईरान को अपने तेल निर्यात में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. शिपिंग डेटा और विश्लेषकों का कहना है कि ईरान के बंदरगाहों और स्टोरेज में जगह कम पड़ने लगी है. इसलिए बड़ी मात्रा में तेल टैंकरों में ही जमा हो रहा है. कुछ जहाजों ने अपनी ट्रैकिंग प्रणाली भी बंद कर दी है. इससे यह पता लगाना मुश्किल हो गया है कि ईरान अपने ग्राहकों तक कितना तेल भेज पा रहा है.
चीन इस समय ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है. अनुमान के अनुसार चीन रोजाना करीब 13 से 14 लाख बैरल ईरानी तेल खरीदता है. यह ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा माना जाता है. लेकिन अमेरिकी नाकेबंदी के कारण यह तेल चीन तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहा है. इससे चीन की ऊर्जा जरूरतों पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.
ऑयल एनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा के मुताबिक 13 अप्रैल से 25 अप्रैल के बीच ओमान की खाड़ी से ईरानी तेल लेकर निकलने वाले जहाजों की संख्या बहुत कम रही. यह आंकड़ा मार्च के मुकाबले करीब 80 प्रतिशत कम है. मार्च में इसी अवधि के दौरान ईरान ने लगभग 2.34 करोड़ बैरल तेल निर्यात किया था. वहीं अब सिर्फ करीब 40 लाख बैरल तेल ही ओमान की खाड़ी से बाहर निकल पाया है. हालांकि यह भी साफ नहीं है कि इन जहाजों को आगे जाकर रोका गया या नहीं.
इस स्थिति का असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ रहा है. ईरान की सप्लाई कम होने से वैश्विक बाजार में तेल की कमी और बढ़ गई है. होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने के कारण सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक से तेल निर्यात भी प्रभावित हुआ है. इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी जा रही है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति बाधाओं में से एक बताया है. अगर स्थिति जल्दी नहीं सुधरी, तो ईरान को सीमित स्टोरेज के कारण अपने तेल उत्पादन को भी कम करना पड़ सकता है.
