देश में इन दिनों मनरेगा को लेकर कई पार्टियां सरकार के विरोध में उतरी हैं. अब आम आदमी पार्टी ने पंजाब में मनरेगा फंडिंग का 40% बोझ राज्यों के ऊपर डालने वाले फैसले का विरोध किया है. आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह फैसला संघीय ढांचे पर सीधे तौर पर हमला है और योजनाओं को बेहद कमजोर करने की कोशिश है.
आम आदमी पार्टी का केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन
आम आदमी पार्टी ने सरकार के मनरेगा योजना को खत्म करने के फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया है. यह प्रदर्शन नाभा के पटियाला गेट पर केंद्र सरकार के खिलाफ किया गया है. इस प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में मनरेगा मजदूरों ने सड़कों पर आकर केंद्र के खिलाफ काफी नारेबाजी की है. पंजाब में इन मजदूरों ने रोजगार गारंटी योजना में गरीब विरोधी नीतिगत बदलावों के विरोध में अपना गुस्सा दिखाया है.
सरकार में मनरेगा की आत्मा को बदल दिया- देव मान

पंजाब में आम आदमी पार्टी से विधायक गुरुदेव सिंह देव मान का कहना है कि केंद्र मनरेगा का नाम बदल ले लेकिन इसकी नीतियों में किसी भी तरह का बदलाव नहीं स्वीकार किया जाएगा. देव नाम का कहना है कि मोदी सरकार ने मनरेगा की आत्मा को बदल दिया है. उनका कहना है कि इन नई नीतियों का सीधा मकसद गरीबों को नुकसान पहुंचाना है.
देश को मजदूरों ने बनाया- देव मान
इस प्रदर्शन में आप ने केंद्र पर आरोप लगाया है कि जिन लोगों ने अपनी मेहनत से देश को बनाया है, यह उनके साथ धोखा है. देव मान ने कहा कि इस पूरे देश को मजदूरों ने बनाया है, लेकिन फिर भी आज उन्हीं मजदूरों के ऊपर हमले हो रहे हैं. देव मान में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के लिए और मनरेगा के हक में आवाज उठाने के लिए धन्यवाद भी किया है.
मजदूरों से की एकजुटता की अपील
देव मान ने कहा कि पंजाब विधानसभा ने केंद्र से यह सीधे तौर पर मांग की है कि मनरेगा को उसके पुराने रूप में बहाल किया जाए. इस प्रदर्शन में आप के नेता अमरीक सिंह बांगड़ भी मौजूद थे, उन्होंने मजदूरों से एकजुटता की अपील करते हुए केंद्र की इन नीतियों का काफी विरोध किया. इनके साथ ही आप एससी विंग के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह जीपी का कहना है कि इसको लेकर पूरे पंजाब में पार्टी प्रदर्शन कर रही है.
केंद्र सरकार गरीबों पर हमला करती है- गुरप्रीत सिंह जीपी
आप के एससी विंग के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह जीपी के ऊपर आरोप लगाते हुए कहा कि यह किसानों, मजदूरों और पिछड़े वर्गों पर लगातार हमला करती है. उन्होंने कहा कि पहले किसानों के लिए 3 काले कानून लाए गए थे और उसके बाद संविधान को कमजोर करने की कोशिश की गई थी. उन्होंने कहा कि इन सभी के बाद अब मनरेगा के इन नए कानूनों की वजह से गरीबों परिवारों और कामकाजी महिलाओं पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है. उनका कहना है कि इस बेइंसाफी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा है कि जब तक केंद्र मनरेगा के इन बदलावों को वापस नहीं लेगा तब तक आंदोलन बंद नहीं किया जाएगा.
