Ram Mandir Trust Dispute: ये खबर सपा नेता पवन पांडे के उस सनसनीखेज खुलासे पर आधारित है जिसमें उन्होंने दावा किया है कि राम मंदिर में चढ़ावे और गहनों की चोरी की भनक सबसे पहले अखिलेश यादव को लगी थी और यह पूरा मामला चोरों के आपसी बंटवारे की लड़ाई की वजह से बाहर आया.

Ram Mandir Trust Dispute: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला इन दिनों हर तरफ छाया हुआ है. यह मामला अब सिर्फ धर्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस पर भारी सियासत भी शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी के नेता और अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडे ने इस पूरे मामले को लेकर एक बहुत बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि राम मंदिर में जो चढ़ावे और गहनों की चोरी हुई है, उसकी सबसे पहली भनक समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को लगी थी. अखिलेश यादव ने ही फोन करके उन्हें इस बात की जानकारी दी थी, जिसके बाद इस पूरे घोटाले का सच सामने आ पाया.
पवन पांडे ने एक पॉडकास्ट में इस बात का खुलासा किया कि अखिलेश यादव को अपने सूत्रों से पहले ही पता चल गया था कि मंदिर के चढ़ावे में कुछ गड़बड़ चल रही है. जब अखिलेश यादव ने फोन करके पवन पांडे से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने भी अपने स्तर पर इसकी छानबीन की. जांच करने पर पता चला कि मंदिर से सचमुच भारी मात्रा में नकदी और सोने-चांदी के आभूषण गायब किए गए हैं. पवन पांडे के इस खुलासे के बाद जब अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया, तो पूरे देश में इस घोटाले को लेकर तहलका मच गया.
सपा नेता ने इस चोरी के बाहर आने की दो बहुत ही दिलचस्प वजहें बताई हैं. उनका पहला दावा है कि भगवान राम खुद चाहते थे कि यह सच दुनिया के सामने आए, इसलिए उन्होंने इसके लिए अखिलेश यादव को जरिया बनाया. वहीं, दूसरा कारण उन्होंने बहुत ही हैरान करने वाला बताया है. उनके मुताबिक, जो लोग इस चोरी में शामिल थे, वे आपस में पैसों और गहनों के बंटवारे को लेकर लड़ पड़े. मंदिर के चढ़ावे को गिनने वाले लोगों के बीच इस बात का झगड़ा शुरू हो गया कि कौन ज्यादा माल अपने घर ले जा रहा है. इसी आपसी टकराव की वजह से यह राज बाहर आ गया.
पवन पांडे ने राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर सीधे उंगली उठाई है. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट में चंपत राय की मर्जी के बिना एक पत्ता तक नहीं हिलता था. उनका कहना है कि चढ़ावे की चोरी करने वाले लोगों को ऊपर से पूरा सपोर्ट मिल रहा था, लेकिन जब मामला बिगड़ा तो कुछ लोगों को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा. सपा नेता ने सवाल उठाया कि अगर चंपत राय और बाकी लोग बेकसूर थे, तो उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर आरोप झूठे थे, तो ट्रस्ट ने उन पर मानहानि का मुकदमा क्यों नहीं किया.
पवन पांडे ने इस मामले के लिए बनी एसआईटी (SIT) जांच पर भी पूरी तरह से अविश्वास जताया है. उन्होंने कहा कि इस जांच का कोई फायदा नहीं है क्योंकि जो लोग जांच की मांग कर रहे हैं, रिपोर्ट भी उन्हीं को सौंपी जानी है. उन्होंने मांग की है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पूरे घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए. जरूरत पड़े तो इस पुराने ट्रस्ट को तुरंत भंग करके एक नया और पारदर्शी सिस्टम बनाना चाहिए ताकि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिल सके और श्रद्धालुओं का भरोसा न टूटे.
