अयोध्या में दानपात्र की चोरी में जांच के आदेश देने वाले मामले पर अखिलेश यादव ने सरकार पर कटाक्ष किया है. दरअसल, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर में दानपात्र वाले विवाद पर तीन सदस्य एसआईटी का गठन किया था. इसमें लखनऊ के मंडलायुक्त भी शामिल थे.
अंतिम रिपोर्टे के बाद फैसला
दरअसल, समिति ने मामले की गरिमा को देखते हुए मुख्यमंत्री के कार्यालय निर्देश पर त्रि-स्तरीय एसआईटी का गठन किया है. इस समिति में गृह और वित्त विभाग के संग में समन्वय बैठाया गया है. साथ ही समिति को आदेश दिए गए हैं कि 7 दिन के अंदर प्रारंभिक रिपोर्ट देना और 15 के अंदर अंतिम जांच की रिपोर्ट को सौंपना है. अंतिम रिपोर्ट के बाद में आगे का फैसला लिया जाएगा. जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ में फिर एक्शन लिया जाएगा.
सनातन का अपमान
बता दें कि इस मुद्दे पर अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट कर कहा हैं कि पुजारियों की जांच करना सनातन धर्म का अपमान करने जैसा है. लाईट और कैमरा बंद कर दो और प्रभु भीम के आगे हाथ जोड़ माफी मांग कर चढ़ावा वापस कर दो. भगवान माफ कर देंगे. ऐसे में यह मामला राजनीतिक तूल पकड़ता हुआ दिखाई दे रहा है. उन्होंने साफ तौर पर इस जांच को सनातन धर्म का अपमान करना कहा हैं.
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