baramati by election congress withdraws: महाराष्ट्र के बारामती उपचुनाव में कांग्रेस ने अजीत पवार को श्रद्धांजलि देने के तौर पर अपने उम्मीदवार आकाश मोरे का नाम वापस ले लिया है. एनसीपी नेताओं और सुनेत्रा पवार की अपील के बाद लिए गए इस फैसले ने राज्य में आपसी सम्मान की राजनीति का एक नया उदाहरण पेश किया है, हालांकि अब भी 23 निर्दलीय उम्मीदवारों को मनाने की चुनौती बरकरार है.

baramati by election congress withdraws: महाराष्ट्र की राजनीति में बारामती उपचुनाव को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है. Indian National Congress ने इस सीट से अपने उम्मीदवार को मैदान से हटाने का फैसला किया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Harshvardhan Sapkal ने घोषणा की कि कांग्रेस उम्मीदवार आकाश मोरे चुनाव नहीं लड़ेंगे. यह फैसला वरिष्ठ नेता Ajit Pawar के हाल ही में हुए प्लेन हादसे में निधन के बाद सम्मान जताने के तौर पर लिया गया बताया गया है. शुरुआत में कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए थे और उसे बीजेपी की बी-टीम तक कहा था. लेकिन बाद में परिस्थितियां बदलने पर पार्टी ने अपना रुख नरम कर लिया.
इस फैसले के पीछे कई राजनीतिक कारण भी सामने आए हैं. Nationalist Congress Party के नेताओं ने कांग्रेस से सहयोग की अपील की थी. Sunetra Pawar, Chhagan Bhujbal और Dhananjay Munde जैसे नेताओं ने कांग्रेस से व्यक्तिगत तौर पर बात की. उनका कहना था कि यह समय राजनीतिक टकराव का नहीं बल्कि संवेदनशीलता दिखाने का है. साथ ही Devendra Fadnavis की ओर से भी ऐसी अपील की गई कि राज्य की पुरानी राजनीतिक परंपराओं का सम्मान किया जाए. इन अपीलों के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने विचार किया और अंत में उम्मीदवार वापस लेने का फैसला किया.
इस पूरे घटनाक्रम में कई अहम मुलाकातें भी हुईं. सुनेत्रा पवार ने खुद कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge से मुलाकात की. वहीं Rohit Pawar ने भी कांग्रेस नेताओं से बात की. उन्होंने Parth Pawar के पुराने बयान के लिए माफी मांगी. उस बयान में पार्थ पवार ने कांग्रेस के पतन की बात कही थी. इस माफी के बाद माहौल काफी हद तक बदल गया. कांग्रेस को भी यह मौका मिला कि वह खुद को बड़े दिल वाली पार्टी के रूप में पेश कर सके.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव मैदान से हटने के बावजूद कांग्रेस को इससे बड़ा फायदा मिला है. पार्टी ने खुद को महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति और आपसी सम्मान की परंपरा का समर्थक बताया है. इससे कांग्रेस की छवि एक जिम्मेदार और परिपक्व पार्टी की बनी है. Supriya Sule ने भी कहा कि उनके परिवार और कांग्रेस के बीच रिश्ते दशकों पुराने हैं. यह रिश्ता केवल राजनीति या विचारधारा तक सीमित नहीं है. इसमें भरोसा और आपसी सम्मान भी शामिल है.
इस फैसले के बाद पवार परिवार की ओर से कांग्रेस का आभार जताया गया है. Jay Pawar ने कहा कि उनके पिता ने हमेशा राजनीति से ऊपर उठकर काम किया. इसलिए अगर चुनाव निर्विरोध हो जाए तो यह उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी. हालांकि अभी पूरी तरह रास्ता साफ नहीं हुआ है. बारामती सीट पर 23 निर्दलीय उम्मीदवार अब भी मैदान में हैं. Nationalist Congress Party इन उम्मीदवारों को मनाने की कोशिश कर रही है. ताकि चुनाव बिना मुकाबले के पूरा हो सके. अगर ऐसा होता है तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक अनोखा उदाहरण माना जाएगा.
