LDA Action in lucknow: राजधानी लखनऊ के अलीगंज में जिस 4 मंजिला इमारत में आग लगने से 15 लोगों की जलकर मौत हुई थी, उसे ढहाया जा रहा है. शनिवार सुबह 7:30 बजे लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के 45 अफसर और कर्मचारी 3 बुलडोजर और एक हाइड्रोलिक मशीन लेकर मौके पर पहुंचे. अलीगंज में बिल्डिंग को गिराने के लिए तीन मशीनें लाई गई हैं. इनमें एक जेसीबी, एक हैड्रोलिक मशीन और एक मलवा भरने वाली मशीन शामिल है.
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. आसपास के पूरे इलाके की घेराबंदी कर बैरिकेडिंग लगा दी गई है और सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को रोक दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि पूरी इमारत को पूरी तरह से जमींदोज करने में शाम तक का समय लग सकता है.
15 लोगों की मौत
गौरतलब है कि बीते 22 जून को इस चार मंजिला इमारत के दूसरे माले पर संचालित एनिमेशन कोचिंग इंस्टीट्यूट में अचानक भीषण आग लग गई थी. इस हादसे में 15 लोगों की जलकर और दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई थी,वहीं, 5 लोगों ने किसी तरह पाइप और तारों के सहारे नीचे उतरकर अपनी जान बचाई थी. जान बचाने की कोशिश में दूसरी मंजिल से कूदे एक युवक को रीढ़ में गंभीर चोट आने के कारण पैरालाइज होना पड़ा.
जांच में अवैध निकली बिल्डिंग
हादसे के बाद जब एलडीए ने मामले की जांच की तो पाया गया कि यह बिल्डिंग पूरी तरह अवैध रूप से बनाई गई थी. रिहायशी परिसर के रूप में स्वीकृत इस नक्शे का इस्तेमाल व्यावसायिक (कमर्शियल) गतिविधियों के लिए किया जा रहा था.
एलडीए ने मकान मालिक वीरेंद्र शुक्ला को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और संतोषजनक उत्तर न मिलने पर 10 जुलाई को ध्वस्तीकरण का अंतिम आदेश जारी किया था. 10 जुलाई को ध्वस्तीकरण का आदेश जारी करते हुए 15 दिन के भीतर खुद इमारत गिराने के आदेश दिए थे. मकान मालिक को खुद निर्माण हटाने के लिए 15 दिनों का समय (25 जुलाई/शुक्रवार तक) दिया गया था. डेडलाइन खत्म होते ही शनिवार सुबह एलडीए ने कार्रवाई शुरू कर दी.
“यह गैर-कानूनी कार्रवाई है-मकान मालिक
लखनऊ मकान मालिक और वकील राजेंद्र प्रसाद शुक्ला कहते हैं, “यह गैर-कानूनी कार्रवाई है। नोटिस में 25 जुलाई तक की समय-सीमा दी गई थी। नोटिस के मुताबिक, मैं कार्रवाई करने आया था, लेकिन अलीगंज पुलिस स्टेशन से मुझे इजाज़त नहीं मिली. मुझे इमारत गिराने की इजाज़त सिर्फ़ 20 जुलाई को मिली थी. मैं 20 जुलाई से ही इस पर काम कर रहा था और आज भी काम चल रहा था. उनके नोटिस के हिसाब से मेरे पास 25 जुलाई की शाम तक का समय था… यह कैसा न्याय है? यह लोकतंत्र है। वे अभी पूरी फ़ोर्स के साथ इसे गिराने आ गए हैं। अगर उन्हें मेरी कार्रवाई पर कोई आपत्ति थी, तो उन्हें 26 तारीख को आना चाहिए था। वे समय से पहले क्यों आ गए? मैं इसका विरोध करता हूँ…”
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