छत्तीसगढ़ के बस्तर में सेंट्रल जोनल काउंसिल की बैठक हो रही है. इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के साथ 4 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए हैं. इन राज्यों में 3 समतल राज्यों के साथ एक पहाड़ी राज्य भी शामिल है.

बस्तर में सेंट्रल जोनल काउंसिल की बैठक
छत्तीसगढ़ का बस्तर एक समय पर नक्सल हिंसा और सुरक्षा ऑपरेशनों का केंद्र हुआ करता था, लेकिन अब यह इलाका राष्ट्रीय नीति और संघीय तालमेल की बैठकों का मंच बन रहा है. आज मंगलवार को बस्तर में 26वीं सेंट्रल जोनल काउंसिल की बैठक हो रही है. इस बैठक को केद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित किया गया है. बैठक में 4 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए हैं.
इन राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल
आपको बता दें कि बस्तर में हो रही इस बैठक में 3 समतल राज्य उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों के साथ में एक पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के साथ कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल हैं. इस बैठक में गृह मंत्रालय की अंक व्यापक राजनीति के साथ सुरक्षा और विकास की रणनीति दिखाई दे रही है. इस बैठक को लेकर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि इसके लिए बस्तर को ही क्यों चुना गया है.
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बस्तर में क्यों हो रही बैठक?
आपको बता दें कि बस्तर काफी समय से नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है. इस बैठक के जरिए गृह मंत्रालय यह संदेश देना चाहता है कि यहां से नक्सलवाद खत्म हो चुका है. बस्तर में मीटिंग के जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि जहां सुरक्षा बलों पर हमले किए जाते थे, वहां आज देश के बड़े मुख्यमंत्री और गृह मंत्री सुरक्षित रूप से बैठकर बैठक कर रहे हैं.
किन मुद्दों पर चर्चा?
इस बैठक के दौरान सुरक्षा मुद्दों के साथ विकास के मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी. इस दौरान राज्यों के बीच में समन्वय बढ़ाने और अपराधों के खिलाफ जांच को तेज करने जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी. इसी के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, शहरी विकास और सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं. गृह मंत्री ने कहा है कि बस्तर में शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा प्रकल्प की शुरुआत हुई और छत्तीसगढ़ में हमारे लगभग 200 CAPF कैंप हैं.
उन्होंने कहा कि ये 200 कैंप अब यहां के आदिवासियों, बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं. उन्होंने कहा कि इन 200 में से 70 कैंप शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा के नाम से जाने जाएंगे और इस क्षेत्र को विकसित करने का मॉडल बनेंगे. उन्होंने कहा कि यहां से अब 371 योजनाओं का काम ऑनलाइन भी हो सकेगा.
क्या होता है सेंट्रल जोनल काउंसिल?
बस्तर में होने वाली बैठक सेंट्रल जोनल काउंसिल की है. सेंट्रल जोनल काउंसिल भारत के 5 जोनल काउंसिलों में से एक है. इसका उद्देश्य राज्यों और केंद्रों के बीच में बेहतर समन्वय बनाना होता है. केंद्रीय गृह मंत्री इन परिषदों के अध्यक्ष होते हैं और राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रशासक और वरिष्ठ मंत्री इसके सदस्य होते हैं. हर साल इसके सदस्य राज्यों में से एक मुख्यमंत्री इसके उपाध्यक्ष की भूमिका निभाता है.
11 सालों में 64 बैठकें
आपको बता दें कि परिषद के अंडर मुख्य सचिव स्तर की स्थाई समिति भी बनाई गई है. यह समिति पहले मुद्दों की समीक्षा करती है और उसके बाद उन्हें परिषद की बैठक में रखती है. पिछले लगभग 11 सालों में विभिन्न काउंसिलों और उनकी स्थायी समितियों की कुल 64 बैठकें हो चुकी हैं. बस्तर में हो रही इस बैठक का उद्देश्य राज्यों में बीच में तालमेल बढ़ाना भी है.
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड जैसे राज्य कानून व्यवस्था, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा और बैंकिंग पहुंच जैसी कई चुनौतियां रखते हैं. गृह मंत्रालय चाहता है कि ये सभी राज्य एक दूसरे के सफल मॉडलों को शेयर करें और उसी रणनीति पर काम करें. इस दौरान उत्तराखंड जैसे छोटे पहाड़ी राज्य को भी इस जरूरी बैठक में शामिल किया गया है.
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