Sonam Wangchuk Eviction: दिल्ली पुलिस ने एक सुनियोजित सीक्रेट ऑपरेशन के तहत जंतर मंतर पर सादे कपड़ों में सफेद चादरों का घेरा बनाकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को मंच से हटाया और बिगड़ती सेहत के कारण सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया.

Sonam Wangchuk Eviction: दिल्ली के जंतर मंतर पर कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने वहां से हटा दिया है. शनिवार की सुबह दिल्ली पुलिस ने एक बेहद सीक्रेट ऑपरेशन चलाकर वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से उठाया और अस्पताल पहुंचाया. इस पूरी कार्रवाई को इतने गुपचुप तरीके से अंजाम दिया गया कि वहां मौजूद दूसरे प्रदर्शनकारियों को भनक तक नहीं लगी. पुलिस के आला सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नए पुलिस कमिश्नर के कमान संभालते ही एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई गई थी. इसी बैठक में वांगचुक को जंतर मंतर से हटाने की पूरी इनसाइड स्टोरी और रणनीति तैयार की गई थी.
पुलिस ने सुबह का वक्त और सन्नाटा देखकर शुरू किया सीक्रेट मिशन
दिल्ली पुलिस के रणनीतिकारों ने इस कार्रवाई के लिए शनिवार सुबह का समय चुना. पुलिस जानती थी कि सुबह के वक्त जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों की संख्या सबसे कम होती है. इसके साथ ही पुलिस की नजर वांगचुक के सबसे करीबी सहयोगी अभिजीत दिपके पर भी थी. पुलिस सही मौके के इंतजार में थी. जैसे ही अभिजीत किसी काम से कुछ देर के लिए धरना स्थल से बाहर गए, पुलिस ने तुरंत अपना ऑपरेशन शुरू कर दिया. अगर अभिजीत वहां होते, तो शायद प्रदर्शनकारी हंगामा कर सकते थे. इसलिए उनके जाते ही सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मी एक्टिव हो गए.
सफेद चादरों का घेरा बनाकर मंच से उठाए गए सोनम वांगचुक
इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए नई दिल्ली जिले के स्पेशल स्टाफ और लोकल पुलिस के करीब 30 से 35 जवान सादे कपड़ों में पहुंचे. वे चुपके से प्रदर्शन स्थल के अंदर दाखिल हुए. वहां पहुंचते ही जवानों ने सबसे पहले सोनम वांगचुक के बिस्तर को चारों तरफ से बड़ी बड़ी सफेद चादरों से घेर दिया. ऐसा इसलिए किया गया ताकि बाहर खड़ा कोई भी व्यक्ति यह न देख सके कि अंदर क्या चल रहा है और कोई वीडियो न बना पाए. चादरों की आड़ में पुलिस ने बहुत ही शांति से वांगचुक को मंच से नीचे उतारा और बाहर ले आई.
तीन कड़े चरणों में पूरा हुआ दिल्ली पुलिस का यह खास प्लान
पुलिस ने इस पूरे मिशन को तीन अलग अलग हिस्सों में बांट रखा था. पहले चरण में सादे कपड़ों वाले जवानों ने मंच को अपने घेरे में लेकर वांगचुक को वहां से सुरक्षित निकाला. दूसरे चरण में सीआरपीएफ (CRPF) और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने मोर्चा संभाला. उन्होंने बैरिकेडिंग के बाहर खड़े बाकी प्रदर्शनकारियों को रोक कर रखा ताकि कोई झड़प न हो पाए. तीसरे चरण में दिल्ली पुलिस के बड़े अधिकारी एंबुलेंस के पास बने कंट्रोल पॉइंट से पल पल की रिपोर्ट ले रहे थे. वांगचुक को एंबुलेंस में बैठाते ही ट्रैफिक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर उन्हें सीधे सफदरजंग अस्पताल पहुंचा दिया.
डॉक्टरों की विशेष टीम की निगरानी में इलाज और अभिजीत का आरोप
कार्रवाई खत्म होने के बाद जब अभिजीत दिपके वापस लौटे, तो वांगचुक को वहां न पाकर दंग रह गए. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाया है. साथ ही उन्होंने अब खुद अनशन पर बैठने का ऐलान कर दिया है. दूसरी तरफ, पुलिस का कहना है कि वांगचुक की सेहत बिगड़ रही थी. सुबह आरएमएल (RML) अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य की जांच की थी और भर्ती करने की सलाह दी थी. इसी वजह से उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां दो डॉक्टरों और दो पैरामेडिकल स्टाफ की स्पेशल टीम उनके इलाज में जुटी है.
