DRDO scramjet engine test: DRDO ने हैदराबाद में स्वदेशी स्क्रैमजेट इंजन का 1200 सेकंड तक सफल परीक्षण कर भारत को हाइपरसोनिक तकनीक वाले चुनिंदा देशों में शामिल कर दिया है. इस तकनीक की मदद से भारत अब ऐसी मिसाइलें विकसित कर सकेगा जिनकी रफ्तार आवाज से 5 गुना तेज होगी और जिन्हें दुश्मन का कोई भी रडार नहीं पकड़ पाएगा.

DRDO scramjet engine test: भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल की है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी DRDO ने एक बेहद आधुनिक स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण हैदराबाद में किया गया. खास बात यह रही कि यह इंजन लगातार 1200 सेकंड यानी करीब 20 मिनट तक सफलतापूर्वक चलता रहा. इससे पहले जनवरी में इसी तकनीक का परीक्षण 700 सेकंड तक हुआ था. अब यह समय लगभग दोगुना हो गया है. इस उपलब्धि को भारत के हाइपरसोनिक मिशन के लिए बहुत अहम माना जा रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस सफलता पर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की जमकर तारीफ की है.
DRDO ने इस परीक्षण के लिए हैदराबाद में एक विशेष सुविधा तैयार की है. इसे SCPT यानी स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट फैसिलिटी कहा जाता है. यहां हाइपरसोनिक इंजन की जांच की जाती है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह इंजन आवाज की रफ्तार से कई गुना ज्यादा तेज गति हासिल कर सकता है. इसी वजह से इसे भविष्य की सबसे खतरनाक सैन्य तकनीकों में गिना जाता है. इस इंजन के सफल परीक्षण के बाद भारत अब उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास हाइपरसोनिक तकनीक विकसित करने की क्षमता है.
इस स्क्रैमजेट इंजन में कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है. इसमें खास तरह का तरल हाइड्रोकार्बन ईंधन लगाया गया है. यह ईंधन भारत में ही तैयार किया गया है. इसके अलावा इंजन में हाई टेम्परेचर थर्मल बैरियर कोटिंग का इस्तेमाल हुआ है. यह परत इंजन को अत्यधिक गर्मी से बचाती है. वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों का भी उपयोग किया. DRDO की प्रयोगशाला DRDL ने इसका डिजाइन तैयार किया. वहीं देश की कई इंडस्ट्री और विश्वविद्यालयों ने भी इस मिशन में सहयोग दिया.
इस सफलता का सबसे बड़ा फायदा भारतीय सेना को मिलने वाला है. माना जा रहा है कि अब भारत जल्द ही हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित कर सकता है. यह मिसाइल बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है और दुश्मन के रडार से बच निकलती है. इसकी रफ्तार इतनी ज्यादा होती है कि दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली इसे रोक नहीं पाएगी. वैज्ञानिकों के अनुसार हाइपरसोनिक मिसाइल आवाज की गति से पांच गुना ज्यादा तेज चलती है. यानी यह 1700 मीटर प्रति सेकंड या उससे ज्यादा रफ्तार पकड़ सकती है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए मजबूत नींव साबित होगी. DRDO प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने भी पूरी टीम को बधाई दी. दुनिया में अभी अमेरिका, रूस और चीन जैसे कुछ ही देशों के पास ऐसी तकनीक मौजूद है. अब भारत भी इस हाईटेक क्लब में शामिल हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह तकनीक भारतीय रक्षा ताकत को नई ऊंचाई दे सकती है और देश की सुरक्षा को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाएगी.
