दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या बेहद जटिल हो चुकी है। इस वक्त स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है, 19 दिसंबर को दिल्ली का AQI 387 बहुत खराब दर्ज किया गया, जो पिछले दिन के 373 से भी बदतर है। कुछ दिनों पहले यह 400-450 के पार ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंच चुका था।
दिल्ली सरकार केंद्र के साथ मिलकर कई कोशिश कर रही है, जैसे GRAP (Graded Response Action Plan) के तहत स्टेज-4 प्रतिबंध, पुरानी गाड़ियों और ट्रकों पर बैन, कंस्ट्रक्शन पर रोक, पानी का छिड़काव, और BS-6 से नीचे की गाड़ियों पर प्रवेश प्रतिबंध। ये उपाय कभी-कभी अल्पकालिक सुधार लाते हैं, लेकिन लंबे समय में प्रदूषण कम नहीं हो रहा। बल्कि सर्दियों में रोज़ स्थिति खराब ही होती जा रही है।

1. प्रदूषण के मुख्य कारण अब स्थानीय हैं, खासकर के वाहन
* पहले पराली जलाने (स्टबल बर्निंग) को बड़ा दोषी माना जाता था, लेकिन 2025 में पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं 90% तक कम हो गई हैं, फिर भी दिल्ली का AQI सुधरा नहीं।
* अब सबसे बड़ा योगदान वाहनों का है, करीब 50-51% PM2.5 प्रदूषण वाहनों से आता है। दिल्ली में 12 मिलियन से ज्यादा वाहन हैं, ट्रैफिक जाम और डीजल वाहन प्रमुख कारण हैं।
2. मौसम की भूमिका
* सर्दियों में तापमान गिरने और हवा की गति कम होने से डस्ट पार्टिकल और धुआं नीचे फंस जाते हैं जिसे इन्वर्शन लेयर कहते हैं ।  
* दिल्ली की जो भौगोलिक स्थिति है वो लैंडलॉक्ड यानी की चारोतरफ़ से घिरी हुई है और निचला इलाका है जिससे प्रदूषक बाहर निकल नहीं पाते
3. शहर का तेज़ विकास और दूसरे कारण
* लगातार बढ़ते वाहन, कंस्ट्रक्शन-डेमोलिशन धूल, इंडस्ट्री और ऊर्जा खपत से उत्सर्जन बढ़ रहा है, जो प्राकृतिक सफाई यानी की बारिश साफ़ हुए वातावरण को फिर से तुरंत खराब कर देता है।
* दूसरे कारण : इंडस्ट्री, कचरा जलाना, आदि।
4. उपाय कितने प्रभावी
GRAP जैसे कदम लागू तो हो रहे हैं, लेकिन इनका असर सीमित है क्योंकि ये ज्यादातर आपातकालीन और अस्थायी होते हैं। लंबे समय के लिए NCR स्तर पर एक दूसरे के साथ मिलकर कोई रास्ता निकालना , बड़े बदलाव जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में भारी निवेश की जरूरत है।
* कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि डेटा मापन के मानक ढीले हैं और जमींन पर वास्तविक स्थिति इससे भी खराब हो सकती है।
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•क्या मास्क वायु प्रदूषण से बचा सकता है ?
मास्क लगाने से वायु प्रदूषण से काफी हद तक बचाव होता है, खासकर दिल्ली जैसे शहरों में जहाँ PM2.5 कणों का स्तर बहुत ऊँचा रहता है। लेकिन यह बचाव सही प्रकार के मास्क और सही तरीके से पहनने पर निर्भर करता है।
सबसे प्रभावी मास्क कौन से हैं?
* N95, KN95, N99 या FFP2 मास्क , ये 95% या उससे ज्यादा PM2.5 कणों 0.3 माइक्रोन से छोटे को फिल्टर करते हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि ये दिल्ली के ट्रैफिक में डीजल सूट काला धुआँ को 70-90% तक कम कर सकते हैं।
* सर्जिकल या कपड़े के मास्क – ये बड़े कणों को रोकते हैं, लेकिन PM2.5 के खिलाफ बहुत कम प्रभावी केवल 10-30% तक।

सही तरीके से पहनना जरूरी
मास्क का पूरा फायदा तभी मिलता है जब वह नाक और मुँह को पूरी तरह कवर करे और चेहरे पर टाइट फिट हो कोई गैप न हो। WHO और विशेषज्ञों की सलाह है कि ढीला मास्क लगाने से बचाव बहुत कम हो जाता है।
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ऐसे पहने N 95 मास्क
कितना फायदेमंद है मास्क ?
* मास्क गैसों जैसे NO2, ओजोन से बचाव नहीं करते, केवल ठोस कणों (PM2.5) से ही बचाओ करते हैं ।
* लंबे समय तक N95 पहनना असुविधाजनक हो सकता है साँस लेने में थोड़ी तकलीफ, इसलिए दिल्ली में कई लोग इसे लगातार नहीं पहन पाते।
* बच्चों, बुजुर्गों या साँस की बीमारी वालों के लिए डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।
कुल मिलाकर N 95 मास्क लगाने से प्रदूषण से अच्छा बचाव होता है, खासकर बाहर जाते समय। दिल्ली सरकार और डॉक्टर भी यही सलाह देते हैं। लेकिन यह अकेला उपाय नहीं,घर में रहें, एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें ।
•दिल्ली के अलावा और कौन-कौन से राज्यों और शहरों में हवा बेहद खराब है।
दिसंबर 2025 की सर्दियों में दिल्ली के अलावा भारत के कई शहरों और राज्यों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब Very Poor या Severe बनी हुई है। ख़ास कर के उत्तर भारत के इंडो-गैंजेटिक प्लेन क्षेत्र में प्रदूषण गंभीर है, जहां AQI 200 से ऊपर Unhealthy से Severe दर्ज किया जा रहा है।
•मुख्य प्रभावित राज्य और शहर 19 दिसंबर 2025 के आसपास के लेटेस्ट डेटा के आधार पर।
* उत्तर प्रदेश – NCR से सटे शहर सबसे ज्यादा प्रभावित।
* गाजियाबाद -AQI 450 के करीब (Severe)
* नोएडा -AQI 255 (Very Poor).
* हापुड़ -AQI 400+ (Severe).
* पंजाब और चंडीगढ़ -AQI 269 (Very Poor).
* अमृतसर -AQI 442 (Hazardous).
•. हरियाणा -NCR शहर जैसे फरीदाबाद, गुरुग्राम अक्सर Very Poor रहते हैं ।
•पश्चिम बंगाल – कोलकाता में AQI 205 ।
* बारूईपुर- AQI 284 (Very Poor).
* आसनसोल , हावड़ा, झारग्राम. AQI 190-400+.
* जम्मू-कश्मीर: बारामूला AQI 500+.
* महाराष्ट्र: पिंपरी-चिंचवड़ AQI 220.
ये स्थिति क्यों खराब है?
मौसम का असर – सर्दियों में तापमान गिरने से इन्वर्शन लेयर बनती है, हवा की रफ्तार कम होती है, और डस्ट पार्टिकल्स फंस जाते हैं। उत्तर भारत का भूगोल हिमालय के करीब होने से ‘बाउल’ जैसा प्रदूषण को बाहर नहीं निकलने देता
