India helps neighbors energy crisis: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच भारत अपने पड़ोसी देशों (मालदीव, बांग्लादेश और श्रीलंका) के लिए एक प्रमुख मददगार के रूप में उभरा है. ‘इंडिया आउट’ जैसे अभियानों को पीछे छोड़ते हुए, भारत ने अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत इन देशों को ईंधन और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की है, जिससे क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक पकड़ और मजबूत हुई है.

India helps neighbors energy crisis: कुछ समय पहले तक भारत के कई पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते काफी खराब हो गए थे. कुछ जगहों पर “इंडिया आउट” और “बायकॉट इंडिया” जैसे अभियान भी चलाए जा रहे थे. लेकिन अब हालात धीरे-धीरे बदलते दिखाई दे रहे हैं. ईरान से जुड़े युद्ध और उससे पैदा हुए ऊर्जा संकट ने पूरे दक्षिण एशिया को प्रभावित किया है. तेल और गैस की कमी के कारण कई देशों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे समय में वही देश जो पहले भारत का विरोध कर रहे थे. अब मदद के लिए भारत की ओर देख रहे हैं. इससे क्षेत्र में एक शांत लेकिन अहम बदलाव देखने को मिल रहा है.
बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका जैसे कई पड़ोसी देश अब तेल और गैस की आपूर्ति के लिए भारत से संपर्क कर रहे हैं. ऊर्जा संकट का असर वहां के आम लोगों के जीवन पर भी पड़ने लगा है. भारत ने पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ते हुए मदद का हाथ बढ़ाया है. सरकार अपनी “नेबरहुड फर्स्ट” नीति के तहत पड़ोसी देशों को सहयोग देने की कोशिश कर रही है. यह कदम क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
इस पूरे संकट की एक बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है. इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति एशियाई देशों तक पहुंचती है. अगर यहां कोई बाधा आती है तो कई देशों की ऊर्जा जरूरतें प्रभावित होती हैं. पाकिस्तान, बांग्लादेश, भारत और श्रीलंका जैसे देशों की निर्भरता इससे साफ दिखाई देती है. हालांकि ईरान ने भारत जैसे मित्र देशों के लिए कुछ राहत दी है. ईरान ने कहा है कि भारतीय तेल और एलपीजी टैंकरों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी जाएगी.
संकट के बावजूद भारत ने अपने पड़ोसियों की मदद शुरू कर दी है. भारत पहले ही बांग्लादेश और श्रीलंका को बड़ी मात्रा में ईंधन भेज चुका है. मालदीव की मांग पर भी विचार किया जा रहा है. इसके अलावा भूटान और नेपाल को भी बिना किसी रुकावट के ईंधन की आपूर्ति जारी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इन देशों ने भारत से मदद मांगी है. उन्होंने कहा कि भारत घरेलू जरूरतों का आकलन करने के बाद सहायता देने का फैसला कर रहा है. फिलहाल भारत के पास करीब दो महीने का ईंधन भंडार मौजूद है.
इस संकट का सबसे ज्यादा असर बांग्लादेश में दिखाई दे रहा है. यह देश अपने लगभग 95 प्रतिशत तेल और करीब 30 प्रतिशत गैस का आयात करता है. गैस की कमी के कारण वहां कई जगहों पर बिजली कटौती हो रही है. टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं. बिजली बचाने के लिए कई विश्वविद्यालय बंद कर दिए गए हैं और कुछ उर्वरक कारखाने भी बंद पड़े हैं. ऐसे समय में भारत ने बांग्लादेश की मदद करते हुए फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए डीजल की आपूर्ति बढ़ा दी है. वहीं श्रीलंका और मालदीव को भी भारत से राहत मिली है. इससे यह साफ हो गया है कि मुश्किल समय में दक्षिण एशिया के लिए भारत एक अहम सहयोगी बनकर सामने आ रहा है.
