india iran strait of hormuz: विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हुई सफल वार्ता के बाद भारतीय जहाजों को Strait of Hormuz से सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिल गई है. यह कूटनीतिक उपलब्धि वैश्विक तनाव के बीच भारत की तेल और गैस आपूर्ति को निरंतर बनाए रखने में मील का पत्थर साबित होगी.

india iran strait of hormuz: पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. जानकारी के अनुसार भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi के बीच दूरभाष पर बातचीत हुई. इस बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल जहाजों को Strait of Hormuz से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है. यह रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में माना जाता है. इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस अलग-अलग देशों तक पहुंचती है.
सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं की बातचीत का मुख्य उद्देश्य इसी समुद्री मार्ग को खुला रखना था. हाल के दिनों में क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को लेकर चिंता बढ़ गई थी. भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा समुद्र के रास्ते आने वाले तेल और गैस पर निर्भर करता है. इसलिए इस मार्ग से भारतीय जहाजों का सुरक्षित गुजरना देश के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है.
बताया गया है कि भारत ने केवल ईरान से ही नहीं, बल्कि अन्य बड़े देशों से भी संपर्क किया. विदेश मंत्री S. Jaishankar ने इस मुद्दे पर Sergey Lavrov और Jean‑Noël Barrot से भी चर्चा की. इन बातचीतों का उद्देश्य समुद्री व्यापार के रास्तों को खुला रखना और तेल-गैस की आपूर्ति को बाधित होने से बचाना था. भारत ने कूटनीतिक स्तर पर लगातार संवाद बनाए रखा ताकि वैश्विक व्यापार पर असर कम से कम पड़े.
ईरान ने यह छूट ऐसे समय में दी है जब कई देशों के जहाजों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है. बताया गया है कि अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों के लिए इस समुद्री रास्ते पर अभी भी कई तरह की पाबंदियां लागू हैं. लेकिन भारत के साथ संबंधों को देखते हुए ईरान ने भारतीय टैंकरों को सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति दी है. इससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति को बड़ा सहारा मिला है.
मौजूदा तनाव के कारण Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की संख्या भी काफी कम हो गई है. कुछ रिपोर्टों के अनुसार इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग नब्बे प्रतिशत तक घट गई है. कई देशों के टैंकर रास्ते में फंसने की स्थिति में पहुंच गए हैं. ऐसे समय में भारत के जहाजों को मिली यह अनुमति कूटनीतिक स्तर पर बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. इससे देश में तेल और गैस की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
