ईरान इजरायल और अमेरिका के बीच हुए जंग में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. उनकी मौत के बाद पूरे शिया मुस्लिम समुदाय के बीच में शोक का माहौल देखने को मिला था. भारत में भी कई जगह उनकी मौत पर अमेरिका के खिलाफ प्रदर्शन किए गए थे. बता दें कि तीन दिन तक उनकी अंतिम संस्कार की यात्रा चलने वाली है.
खामनेई की राजकीय अंतिम यात्रा 4 जुलाई से शुरू होगी. 9 जुलाई को उनका (सुपुर्द-ए-खाक) अंतिम संस्कार किया जाएगा. खामनेई की अंतिम यात्रा दो देशों से होकर गुजरेगी. ईरान के शहर के अलावा इराक में भी उनका जनाजा ले जाएगा. जिन-जिन जगहों से उनका जनाजा ले जाया जाएगा. वे सभी तेहरान के इस्लामिक गणराज्य के राजनीतिक, धार्मिक और वैचारिक आधारों को दिखाते हैं. हालांकि, केवल तेहरान ही नहीं बल्कि शिया समुदाय के बीच मान्यता रखने वाले अन्य शहरों कर्बला, कोम, मशहद और नजफ से भी अंतिम यात्रा को लेकर जाया जाएगा. आम लोगों के दर्शन के लिए शनिवार के दिन तेहरान के ग्रैंड मोसाल्ला में भी उनका शव रखा जाएगा.
तेहरान से अंतिम यात्रा जाना राजनीतिक महत्व को भी दर्शाता है. दरअसल, तेहरान में संसद, न्यायपालिका, सैन्य मुख्यालय, राष्ट्रपति कार्यालय मौजूद है.
कहा से होकर जाएगी उनकी यात्रा
उनकी अंतिम यात्रा तेहरान के अलावा भी अन्य शहरों में जाएगी. कोम में भी उनकी अंतिम यात्रा को लेकर जाया जाएगा. इस शहर ने धर्मगुरु की कई पीढ़ियों को शिक्षित करा है.
कर्बला शहर शियाओं के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है. यहां पर इमाम हुसैन की मजार है. कर्बला में उनका जनाजा कुर्बानी और दृढ़ता को दिखाता है,
इराक के नजफ में पहले शिया इमाम अली की मजार है. नजफ में उनकी यात्रा ले जाकर यह दर्शाया जाएगा कि कम्युनिटी में खामनेई की अहमियत है.
अंत में उनके शरीर को ईरान के सबसे पवित्र शहर मशहद में दफनाया जाएगा. यहां पर लाखों श्रदालु इमाम रजा की मजार देखने आते है. खामनेई का जन्म भी वहीं पर हुआ है.
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