Iran khamenei successor: अमेरिकी नौसेना का अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ईरान के करीब तैनात किया गया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है. खामेनेई ने अपने उत्तराधिकारी की योजना बनाई है और विरोध प्रदर्शन व दमन के बीच ईरानी शासन कमजोर स्थिति में है.

Iran khamenei successor: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच हालात काफी नाजुक हो गए हैं. अमेरिकी नौसेना का अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ईरान के करीब सेंट्रल कमांड क्षेत्र में पहुंच गया है. इसमें USS फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, USS स्प्रूअन्स और USS माइकल मर्फी जैसे विध्वंसक जहाज शामिल हैं. यह तैनाती क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए की गई है. अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘एहतियाती’ कदम बताया है और कहा है कि जरूरत पड़ने पर ही इसका इस्तेमाल होगा.
इस बीच, ईरान में विरोध प्रदर्शन और उनके दमन के बाद खामेनेई के उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है. कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि खामेनेई राजधानी तेहरान में किसी बंकर में छिपे हुए हैं. सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म OSINTdefender (OSINTdefender एक प्लेटफॉर्म है जो ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस से संबंधित जानकारी पर नजर रखता है.) ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को खामेनेई की कमजोर स्थिति को लेकर कई खुफिया रिपोर्टें मिली हैं. इन रिपोर्टों के मुताबिक, 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान का शासन शायद अपने सबसे कमजोर दौर में है.
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि खामेनेई ने अपने घायल या मारे जाने की स्थिति में अपने उत्तराधिकारी का नाम घोषित कर दिया है. हालांकि, यह आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है. संभावित नामों में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई, सादिक लारीजानी, अलीरेजा आराफी और इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक रूहोल्लाह खोमैनी के पोते हसन खोमैनी शामिल बताए जा रहे हैं. एक्सपर्ट्स की असेंबली ने तीन अज्ञात नामों की सूची भी तैयार की है.
खामेनेई के छिपने की जगह को लेकर अटकलें तेज हैं. कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारियों ने उन्हें तेहरान के उत्तर-पूर्वी इलाके लविजान में एक बंकर में रहने की सलाह दी है. यह बंकर सुरंगों से जुड़ा हुआ है और किसी भी हमले को झेलने के लिए बनाया गया है. मीडिया रिपोर्टों में इसे वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की स्थिति से तुलना की गई है, जब वह सत्ता से हटाए जाने से पहले छिपे थे.

खाड़ी देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से भी ईरान पर हमला न करने की अपील की थी. उनका कहना था कि इससे पूरा क्षेत्र युद्ध की चपेट में आ सकता है. न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य रिपोर्टों में कहा गया है कि खामेनेई शासन की बढ़ती कमजोरी और विरोध प्रदर्शन को दबाने की खूनी कार्रवाई यह संकेत देती है कि ईरानी शासन अब कमजोर स्थिति में है. ऐसे में अमेरिका की वॉर मशीनरी के ईरान के करीब पहुंचने से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है.
यह भी पढ़ेंं: मुनीर से लिया टक्कर… पाकिस्तान में पूर्व आर्मी अधिकारी आदिल रजा आतंकी घोषित; बोले- मेरे लिए सम्मान की बात
