China Pakistan Myanmar: म्यांमार में चीन की मजबूत पकड़ और अब पाकिस्तान की एंट्री से भारत के लिए नई भू-राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है. बांग्लादेश, म्यांमार और चीन–पाक गठजोड़ के चलते भारत के क्षेत्रीय प्रभाव पर दबाव बढ़ता दिख रहा है.

China Pakistan Myanmar: म्यांमार में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती मौजूदगी भारत के लिए नई चिंता बनती जा रही है. 24 जनवरी को म्यांमार के विदेश मंत्री थान स्वे चार दिन के दौरे पर पाकिस्तान पहुंचे हैं. दोनों देशों ने इसे रिश्ते सुधारने की पहल बताया है. लेकिन जानकार इसे पाकिस्तान की क्षेत्र में दखल बढ़ाने की कोशिश मान रहे हैं. पाकिस्तान पहले ही बांग्लादेश के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है. अब म्यांमार में एंट्री से भारत पर दबाव बढ़ सकता है. चीन पहले से ही म्यांमार में मजबूत पकड़ बनाए हुए है. चीन और पाकिस्तान के रिश्ते बहुत करीबी हैं. इन दोनों से भारत के पुराने विवाद हैं. ऐसे में भारत को तीन तरफ से घेरने की आशंका जताई जा रही है.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में पाकिस्तान का असर तेजी से बढ़ा है. दूसरी तरफ 2021 में म्यांमार में सेना ने तख्तापलट कर चुनी हुई सरकार को हटा दिया था. उसके बाद से चीन ने वहां अपना प्रभाव और बढ़ा दिया. चीन म्यांमार के सभी पक्षों से संपर्क बनाए हुए है. सेना से भी और जातीय सशस्त्र संगठनों से भी, इससे भारत के लिए हालात और जटिल हो गए हैं.
ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की श्रीराधा दत्ता कहती हैं कि भारत को बांग्लादेश से ज्यादा मुश्किल म्यांमार में हो रही है. भारत ने वहां सेना और सत्ता प्रतिष्ठान के साथ काम किया है. लेकिन सिविल सोसायटी चाहती है कि भारत चीन के असर को कम करने के लिए ज्यादा गहराई से जुड़ना चाहिए. यह काम आसान नहीं है. पाकिस्तान की एंट्री से मुश्किल और बढ़ सकती है. चीन लंबे समय से म्यांमार की सेना को हथियार और ट्रेनिंग दे रहा है. पिछले साल म्यांमार के जुंटा नेता मिन आंग हलिंग राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बुलावे पर चीन भी गए थे.
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के अंगशुमन चौधरी कहते हैं कि भारत को उम्मीद थी कि उसके पुराने रिश्ते चीन के असर को संतुलित कर पाएंगे. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. बीजिंग ने जुंटा और जातीय संगठनों दोनों से मजबूत रिश्ते बना लिए हैं. भारत और चीन दोनों म्यांमार में बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं. भारत राखिन में सिटवे बंदरगाह को कोलकाता से जोड़ने का 484 मिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट बना रहा है. चीन युन्नान को क्यौकफ्यू से जोड़ने की अरबों डॉलर की रेल और सड़क परियोजना पर काम कर रहा है.

पूर्व राजनयिक केपी फेबियन मानते हैं कि भारत की पड़ोसी नीति हाल के सालों में कमजोर हुई है. बांग्लादेश में भारत हसीना पर बहुत निर्भर था. म्यांमार में सेना पर उसका असर सीमित रहा. चीन और पाकिस्तान मिलकर भारत के प्रभाव को कम करना चाहते हैं. दोनों ने तय कर लिया है कि भारत के खिलाफ एकजुट रहना उनके हित में है. वॉशिंगटन की विशेषज्ञ निलंथी समरनायके कहती हैं कि भारत का क्षेत्र में असर अब भी है. मालदीव और श्रीलंका से रिश्ते सुधरे हैं. लेकिन म्यांमार और बांग्लादेश में चुनौती बनी हुई है.
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