Patna neet student rape murder: NEET छात्रा रेप-हत्या मामले में लापरवाही बरतने पर पटना के चित्रगुप्त नगर थाने की SHO रौशनी कुमारी को सस्पेंड किया गया है. पुलिस अब केस की दोबारा समीक्षा कर रही है और अधिकारियों की भूमिका की आंतरिक जांच भी जारी है.

Patna neet student rape murder: पटना में NEET छात्रा की रेप के बाद हत्या के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है. चित्रगुप्त नगर थाने की SHO रौशनी कुमारी को सस्पेंड कर दिया गया है. SSP पटना ने 25 जनवरी 2026 को यह आदेश जारी किया है. बाद में सोशल मीडिया कोषांग ने इसे सार्वजनिक किया है. इस फैसले से साफ हो गया है कि पुलिस महकमे ने भी SHO को दोषी माना है. छात्रा का परिवार पहले से ही उन पर लापरवाही के आरोप लगा रहा था. अब उन आरोपों को सही ठहराया गया है.
आधिकारिक प्रेस नोट में SHO पर कई गंभीर बातें कही गई हैं. बताया गया है कि उन्होंने मामले की जानकारी जुटाने में ढिलाई बरती है. जरूरी कार्रवाई समय पर नहीं की गई थी. यह मामला बेहद संवेदनशील था. इसके बावजूद शुरुआती जांच को गंभीरता से नहीं लिया गया. इन सभी बातों को कर्तव्य में घोर लापरवाही माना गया है. इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया.
छात्रा के परिवार ने शुरू से ही पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए थे. उनका कहना था कि जांच में जानबूझकर देरी की गई. कुछ अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया था. सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर नाराजगी दिखी. कई लोगों ने चित्रगुप्त नगर थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल किए. बढ़ते दबाव के बाद SSP ने खुद केस की समीक्षा की. उसी के बाद यह कार्रवाई सामने आई.
सस्पेंशन के बाद SHO रौशनी कुमारी का एसेट डिक्लरेशन भी सामने आया है. यह विवरण साल 2023–24 का बताया गया है. इसमें 25 हजार रुपये नकद दर्ज हैं. बैंक में कुल 2 लाख 60 हजार रुपये जमा बताए गए हैं. इसमें SBI मोतिहारी में 25 हजार और SBI बिश्वेश्वरैया भवन में 2 लाख 35 हजार रुपये हैं. उनके पास 2022 मॉडल की रॉयल एनफील्ड बाइक है. आभूषण में 232 ग्राम सोना, 2 ग्राम हीरा और 400 ग्राम चांदी दर्ज है. किसी तरह के शेयर या बॉन्ड का जिक्र नहीं है.

सूत्रों के मुताबिक अब इस मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में होगी. केस से जुड़े सभी बिंदुओं की फिर से समीक्षा की जा रही है. पुलिस की भूमिका की आंतरिक जांच भी चल रही है. माना जा रहा है कि आगे और कार्रवाई हो सकती है. यह कदम साफ संदेश देता है कि ऐसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. दोषी पाए जाने पर किसी भी स्तर के अधिकारी को नहीं छोड़ा जाएगा.
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