Islamic nato forming: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हुए ‘मक्का रक्षा समझौते’ को एक नए ‘इस्लामिक नाटो’ की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के लिए नए समीकरण बन सकते हैं.

Islamic nato forming: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हुए ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ ने दुनिया भर के विदेश मामलों के जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. तीनों शक्तिशाली सुन्नी देशों के एक साथ आने से चर्चा शुरू हो गई है कि क्या यह किसी नए ‘इस्लामिक नाटो’ की शुरुआत है. पश्चिम एशिया में पहले से ही तनाव का माहौल है. ऐसे समय में इन तीनों मुल्कों का हाथ मिलाना क्षेत्रीय राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत देता है. आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि इस समझौते से पावर बैलेंस पर क्या असर पड़ेगा.
तीन देशों की ताकत का बड़ा संगम
इस त्रिपक्षीय सैन्य समझौते में शामिल तीनों देशों की अपनी अलग-अलग मजबूतियां हैं. सऊदी अरब के पास बहुत पैसा है और वह दुनिया के सबसे बड़े हथियार खरीदारों में से एक है. तुर्किए नाटो का मजबूत सदस्य है और उसके पास एक विशाल और आधुनिक सेना है. वहीं पाकिस्तान इस पूरे समूह का अकेला परमाणु हथियार संपन्न देश है. जब ये तीनों ताकतें एक मंच पर आई हैं, तो जाहिर है कि इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. इस फैसले से दुनिया के बड़े-बड़े देशों की चिंता बढ़ गई है.
अमेरिका की जगह नए साथी की तलाश
सऊदी अरब लंबे समय से अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहा है. लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिकी सुरक्षा छत्रछाया की कमियां खुलकर सामने आ चुकी हैं. ईरानी मिसाइलों और हूती विद्रोहियों के हमलों ने सऊदी की चिंता बढ़ा दी थी. अमेरिका अब पश्चिम एशिया में पहले जैसा सक्रिय या निर्णायक नजर नहीं आ रहा है. इसी खाली जगह को भरने और अपनी सुरक्षा पुख्ता करने के लिए सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्किए के साथ नया रणनीतिक गठबंधन बनाने का फैसला किया है.
ईरान के बढ़ते दबदबे को रोकने की कोशिश
पश्चिम एशिया में ईरान का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जिसे रोकने के लिए यह कदम बहुत अहम माना जा रहा है. हालांकि इस समझौते का पूरा मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है. इसलिए यह कहना मुश्किल है कि संकट के समय ये देश एक-दूसरे की मदद के लिए कितना आगे आएंगे. पहले भी सऊदी और पाकिस्तान में रक्षा समझौते रहे हैं, लेकिन ईरानी हमलों के वक्त पाकिस्तान ने सीधे तौर पर कोई सैन्य कदम नहीं उठाया था. देखना होगा कि यह नया त्रिपक्षीय ग्रुप जमीन पर कितना असर दिखाता है.
इजरायल और ईरान के लिए इसके क्या मायने
तुर्किए के नेताओं का कहना है कि यह समझौता किसी खास देश के खिलाफ नहीं बनाया गया है. यह सिर्फ तीनों देशों की आत्मरक्षा और सुरक्षा सहयोग के लिए है. फिर भी इजरायल और ईरान दोनों के लिए यह एक बड़ा संदेश है. पाकिस्तान आज भी इजरायल को देश के रूप में मान्यता नहीं देता और तुर्किए के संबंध भी इजरायल के साथ काफी खराब चल रहे हैं. ऐसे में इजरायल के लिए अपने आसपास बन रहा यह नया सुरक्षा समीकरण चिंता की वजह बन सकता है.
गाजा युद्ध और पश्चिम एशिया के नए समीकरण
गाजा, लेबनान और सीरिया में इजरायल के सैन्य एक्शन का तुर्किए और पाकिस्तान ने जमकर विरोध किया है. हालांकि इस समझौते में इजरायल का सीधा नाम नहीं लिया गया है और न ही इजरायल की तरफ से कोई आधिकारिक बयान आया है. फिर भी क्षेत्र में इजरायल की कार्रवाई और ईरान के साथ बढ़ते तनाव ने इन तीनों देशों को एक साथ आने पर मजबूर किया है. इस नए गठजोड़ के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं.
