कर्नाटक के वाल्मीकि निगम घोटाले में मंत्री बी नागेंद्र ने फिर से पद छोड़ दिया है. साल 2024 के बाद 2026 में दोबारा कुर्सी गंवाने वाले नागेंद्र ने इस्तीफे के बाद BJP पर भी निशाना साधा.
वाल्मीकि निगम घोटाले में मंत्री बी नागेंद्र ने इस्तीफा दे दिया है. जानकारी के मुताबिक नागेंद्र ने हाईकमान से मुलाकात के बाद बेंगलुरु लौटने पर इस संबंध में ऐलान किया. विपक्षी दलों जैसे भाजपा और जेडीएस ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान घोटाले को लेकर उनके इस्तीफे की मांग करते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया था. इसके बाद उन्होंने पदयात्रा की भी घोषणा की थी. अब नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है.
आपको बता दें कि नागेंद्र जो कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले के सिलसिले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मंत्रिमंडल में पूर्व मंत्री थे, उन्होंने 6 जून, 2024 को अपने पद से इस्तीफा दिया था.
फिर छिनी नागेंद्र की कुर्सी
इस्तीफा देने के बाद उन्होंने 3 अगस्त, 2026 को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के मंत्रिमंडल में फिर से मंत्री पद की शपथ ली. हालांकि, विपक्षी दलों के कड़े विरोध के बाद नागेंद्र ने अब फिर से पद छोड़ दिया. इस तरह, उन्होंने एक ही घोटाले को लेकर दो बार अपना मंत्री पदखोया है.
इस्तीफे देने के बाद बी नागेंद्र ने ने कहा कि मनुवादियों ने मुझे निशाना बनाया, क्योंकि वे नहीं चाहते कि कोई आदिवासी व्यक्ति तरक्की करे. वे (भाजपा) मुझे ईडी और सीबीआई से नहीं डरा सकते.
क्या है वाल्मीकि निगम घोटाला?
आपको बता दें कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाला एक बड़ा वित्तीय धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें राज्य में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के कल्याण के लिए आवंटित करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन का अवैध रूप से दुरुपयोग किया गया.
यह घोटाला आधिकारिक तौर पर तब सामने आया जब निगम के लेखा अधीक्षक चंद्रशेखरन पी. ने मई साल 2024 में शिवमोग्गा में मौजूद अपने आवास पर आत्महत्या कर ली थी. निगम के कुल 187 करोड़ रुपये के अनुदान में से लगभग 88 से 89.6 करोड़ रुपये यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एमजी रोड शाखा से जाली दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल करके अनधिकृत खातों में ट्रांसफर किए गए थे.
