प्रयागराज न्यूज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है. बहुचर्चित महंत नरेंद्र गिरी मौत मामले में आरोपी संदीप तिवारी की जमानत याचिका पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होगी. यह सुनवाई जस्टिस विक्रम डी चौहान की सिंगल बेंच में की जाएगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.
जमानत याचिका पर सुनवाई आज
दरअसल, जेल में बंद संदीप तिवारी ने अपनी जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. दाखिल याचिका में उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए रिहाई की मांग की है. उनके वकील की ओर से दलील दी जाएगी कि मामले में उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है और उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं.
महंत नरेंद्र गिरी की हुई थी संदिग्ध मौत
गौरतलब है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की सितंबर 2021 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. यह मामला सामने आने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी और इसकी जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई थी.
तीनों आरोपियों के खिलाफ दर्ज है केस
इस मामले में प्रयागराज के जार्जटाउन थाने में स्वामी आनंद गिरी, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. जांच के बाद CBI ने तीनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी, जिसमें गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
एक आरोपी को मिल चुकी जमानत
इस मामले में आरोपी आद्या तिवारी को पहले ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है. जबकि स्वामी आनंद गिरी और संदीप तिवारी अभी भी जेल में बंद हैं. ऐसे में संदीप तिवारी की जमानत याचिका पर आज होने वाली सुनवाई को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
हाईकोर्ट के फैसले पर नजरें
अब सभी की निगाहें इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं. कोर्ट के इस निर्णय से मामले की आगे की दिशा तय हो सकती है. अगर जमानत मिलती है तो केस में नया मोड़ आ सकता है, वहीं याचिका खारिज होने पर संदीप तिवारी को फिलहाल जेल में ही रहना होगा.
मामले के मुख्य बिंदु
संदीप तिवारी पर महंत नरेंद्र गिरी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है. मामले के अन्य मुख्य आरोपी आनंद गिरी की जमानत पहले ही उच्च न्यायालय से खारिज हो चुकी है, जिसके बाद संदीप तिवारी की इस याचिका को काफी अहम माना जा रहा है. आज कोर्ट में बचाव पक्ष और सीबीआई (CBI) के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। कोर्ट यह देखेगा कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं या उसे राहत दी जा सकती है.
