Maharashtra politics: कल्याण-डोंबिवली में शिंदे की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे ने पुरानी दुश्मनी भूलकर गठबंधन कर बीजेपी को मेयर पद से दूर रखा है. मुंबई BMC में भी सत्ता संघर्ष जारी है, शिंदे ने हाल ही में चुना गए पार्षदों को सुरक्षा के लिए होटल में ठहराया है.

Maharashtra politics: महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ सामने आया है. कल्याण-डोंबिवली नगर निगम चुनाव में एकनाथ शिंदे की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे ने पुरानी दुश्मनी भुलाकर गठबंधन कर लिया है. इस गठबंधन का मकसद बीजेपी को मेयर पद से दूर रखना बताया जा रहा है. चुनाव में 122 सीटों में से किसी गठबंधन को बहुमत के लिए 62 सीटें चाहिए थीं.
बीजेपी ने 50 सीटें जीतकर अच्छा प्रदर्शन किया है. वहीं शिंदे गुट की शिवसेना को 53 और मनसे को 5 सीटें मिलीं. उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना को 11 सीटें मिलीं. शिंदे और मनसे का गठबंधन फिलहाल 58 सीटों पर है. यदि उद्धव गुट के कुछ पार्षद इसमें शामिल हो गए, तो यह गठबंधन बहुमत यानी 62 सीटें हासिल कर लेगा और बीजेपी के साथ मेयर पद साझा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
चुनाव के बाद गठबंधन ने बीजेपी को बड़ा झटका दिया है. बीजेपी 2.5 साल के रोटेशन में मेयर पद साझा करने की मांग कर रही थी. जबकि शिंदे गुट की शिवसेना पूरे कार्यकाल के लिए मेयर पद अपने पास रखना चाहती है. यह स्थिति कल्याण-डोंबिवली में सत्ता समीकरण को पूरी तरह बदल देती है और बीजेपी की रणनीति प्रभावित हुई है.
इस महीने दिसंबर 2025 में अंबरनाथ और अकोला नगर परिषद चुनावों में भी बीजेपी ने अलग-अलग गठबंधन किए थे. अंबरनाथ में कांग्रेस और अकोला में AIMIM के साथ हाथ मिलाया गया था. हालांकि बाद में बीजेपी नेतृत्व ने इन गठबंधनों पर सख्ती दिखाई थी. ऐसे घटनाक्रम राज्य की राजनीति में लगातार बदलाव और गठबंधनों की जटिल तस्वीर दिखाते हैं.

मुंबई की बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में भी सस्पेंस बरकरार है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया है, लेकिन मेयर पद पर सहमति नहीं बन पाई है. शिंदे ने 29 हाल ही में चुना गए शिवसेना पार्षदों को सुरक्षा कारणों से एक फाइव-स्टार होटल में ठहराया. यह घटना महायुति के अंदरूनी मतभेद और सत्ता संघर्ष को दिखाने का काम करती है.
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