passenger vehicle market india: वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में महाराष्ट्र 12.4% हिस्सेदारी के साथ देश का सबसे बड़ा यात्री वाहन बाजार बना है. उत्तर प्रदेश दूसरे और गुजरात तीसरे स्थान पर रहा, जबकि कुल राष्ट्रीय बिक्री में 20.6% की रिकॉर्ड बढ़त दर्ज की गई है.
passenger vehicle market india: देश में यात्री गाड़ियों की खरीद लगातार बढ़ रही है. हाल के ताजा आंकड़ों से साफ है कि महाराष्ट्र एक बार फिर देश का सबसे बड़ा यात्री वाहन बाजार बना है. वित्त वर्ष दो हजार पच्चीस छब्बीस की तीसरी तिमाही यानी अक्तूबर से दिसंबर के बीच महाराष्ट्र ने अपनी पहली स्थिति बनाए रखी है. यह बढ़त सिर्फ बिक्री की नहीं है. यह लोगों के भरोसे और मजबूत आर्थिक हालात की भी पहचान है. आम तौर पर जिस राज्य में रोजगार के अवसर ज्यादा होते हैं. आमदनी बेहतर होती है. और सड़क व दूसरी सुविधाएं मजबूत होती हैं. वहां गाड़ियों की मांग भी तेजी से बढ़ती है. यही वजह है कि महाराष्ट्र इस दौड़ में सबसे आगे नजर आया है.
इन आंकड़ों को सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ने जारी किया है. इसके अनुसार देश में इस तिमाही में कुल बारह लाख छिहत्तर हजार यात्री गाड़ियां बिकीं. यह अब तक की किसी भी तीसरी तिमाही की सबसे बड़ी बिक्री है. बीते साल की तुलना में इसमें बीस दशमलव छह प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. महाराष्ट्र की हिस्सेदारी बारह दशमलव चार प्रतिशत रही है. इससे साफ होता है कि निजी गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ रही है. लोग अब अपने साधन से यात्रा करना ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक मान रहे हैं.
महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा. यहां की हिस्सेदारी दस दशमलव आठ प्रतिशत रही. पहले और दूसरे स्थान के बीच एक दशमलव छह प्रतिशत का अंतर रहा. तीसरे स्थान पर गुजरात रहा. इसकी हिस्सेदारी आठ दशमलव दो प्रतिशत रही. इसके बाद कर्नाटक और तमिलनाडु ने भी शीर्ष पांच राज्यों में जगह बनाई. राजधानी दिल्ली की हिस्सेदारी चार दशमलव आठ प्रतिशत रही. पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों का दबदबा साफ दिखाई दिया. इस क्षेत्र में कुल चार लाख इक्कीस हजार गाड़ियां बिकीं. पास होने और बेहतर आमदनी के कारण हरियाणा की हिस्सेदारी छह दशमलव छह प्रतिशत रही. वहीं राजस्थान पांच दशमलव आठ प्रतिशत के साथ इसके पीछे रहा.
दिल्ली से समृद्ध शहर में भी गाड़ियों की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही. विशेषज्ञों का मानना है कि यहां पहले से बहुत अधिक गाड़ियां हैं. यातायात की समस्या भी गंभीर है. साथ ही प्रदूषण को लेकर सरकारी सख्ती के कारण नई खरीद सीमित हो रही है. मध्य प्रदेश और केरल की हिस्सेदारी चार दशमलव चार और चार दशमलव तीन प्रतिशत रही. पंजाब की हिस्सेदारी चार प्रतिशत रही. तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और बिहार की हिस्सेदारी दो दशमलव एक से तीन दशमलव चार प्रतिशत के बीच रही. अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर बनाई गई श्रेणी की हिस्सेदारी चौदह प्रतिशत रही. इससे पता चलता है कि छोटे बाजारों में भी गाड़ियों की मांग तेजी से बढ़ रही है.
आज कुल बिक्री में करीब दो तिहाई हिस्सेदारी उपयोगी गाड़ियों की है. ऊंचे ढांचे वाली और परिवार के लिए सुविधाजनक गाड़ियां लोगों की पहली पसंद बन रही हैं. अलग अलग कीमत के स्तर पर नए वाहन लगातार पेश किए जा रहे हैं. टाटा और मारुति जैसे ब्रांडों की कई लोकप्रिय गाड़ियों की मांग बनी हुई है. हुंडई और किआ की नई गाड़ियों को भी अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है. हाल ही में मारुति सुजुकी ने बताया था कि गांवों में उसकी बिक्री तेजी से बढ़ी है. बीते दस वर्षों में देश का यात्री वाहन बाजार काफी फैल चुका है. इसकी वजह बढ़ती आय. आसान कर्ज. बेहतर सड़कें और निजी वाहन की ओर बढ़ता झुकाव है. महामारी के बाद लोग सार्वजनिक साधनों की बजाय अपनी गाड़ी से सफर करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. कर प्रणाली में हुए सुधारों के बाद कीमतों पर भी कुछ राहत मिली है. इसी कारण आने वाले समय में भी गाड़ियों की मांग मजबूत बनी रहने की उम्मीद है.
