ran israel war impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद भारत से होने वाला बासमती निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. हरियाणा के व्यापारियों का करोड़ों का भुगतान अटक गया है और बासमती के दामों में प्रति क्विंटल 500 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई है.
iran israel war impact: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं. इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई है. इसके बाद पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता और डर का माहौल बन गया है. ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. वहीं इस पूरे घटनाक्रम में संयुक्त राज्य अमेरिका की भूमिका भी अहम मानी जा रही है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील के बाद हालात और संवेदनशील हो गए हैं. इन घटनाओं का सीधा असर अब भारत से होने वाले चावल के निर्यात पर पड़ने लगा है. कारोबारियों को माल भेजने में रुकावट और भुगतान मिलने में देरी झेलनी पड़ रही है.
हरियाणा के चावल निर्यातकों की परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है. व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि ईरान और अफगानिस्तान जाने वाली कई जहाज़ी खेप फिलहाल रोक दी गई हैं. खास तौर पर वे खेप जो ईरान के प्रमुख बंदरगाह बंदर अब्बास बंदरगाह के रास्ते भेजी जाती थीं, अब आगे नहीं बढ़ पा रही हैं. जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक माल भेजना मुश्किल बना रहेगा. इसका सीधा असर व्यापारियों की आमदनी पर पड़ रहा है. भुगतान अटकने से छोटे और मध्यम निर्यातक ज्यादा दबाव में आ गए हैं.
बासमती चावल के कारोबार पर संकट सबसे गहरा नजर आ रहा है. भारत के कुल बासमती निर्यात में हरियाणा की हिस्सेदारी करीब पैंतीस प्रतिशत मानी जाती है. हरियाणा का करनाल बासमती चावल के निर्यात का बड़ा केंद्र है. यहां के चावल मिल संचालकों का कहना है कि लड़ाई शुरू होते ही बाजार में अनिश्चितता फैल गई है. बहुत कम समय में ही बासमती चावल के दाम चार से पांच रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं. यह गिरावट करीब चार सौ से पांच सौ रुपये प्रति क्विंटल के बराबर मानी जा रही है. इससे किसानों और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ गई है.
निर्यातकों के अनुसार ईरान भारत के बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार है. इसके अलावा भारत से चावल संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, यमन और इराक जैसे देशों में भी भेजा जाता है. हरियाणा के कैथल और सोनीपत से भी बड़ी मात्रा में विदेशी खेप भेजी जाती है. व्यापारियों का कहना है कि मार्च महीने में जाने वाली खेप पर इस संकट का सीधा असर पड़ सकता है.
निर्यातकों के सामने एक और बड़ी चिंता जहाज़ों के बीमा को लेकर खड़ी हो गई है. युद्ध जैसे हालात में बीमा कंपनियां जोखिम उठाने से बच रही हैं. इससे व्यापारियों का नुकसान बढ़ सकता है. सऊदी अरब के बाद ईरान भारत के बासमती चावल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है. हाल ही में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में भारत ने ईरान को करीब दस लाख टन खुशबूदार चावल भेजा था. इसी दौरान कुल बासमती निर्यात लगभग साठ लाख टन रहा था. यह मांग मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के देशों से आई थी. अन्य बड़े खरीदारों में अफगानिस्तान भी शामिल रहा है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्षेत्र में तनाव कब कम होता है और कारोबार फिर से सामान्य रास्ते पर लौटता है.
