iran israel war 2026: अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच ईरान की सैन्य और आर्थिक कमजोरियां खुलकर सामने आ गई हैं. जानकारों का मानना है कि सीमित संसाधनों और बढ़ते घरेलू असंतोष के कारण ईरान के लिए एक लंबा युद्ध लड़ना लगभग नामुमकिन साबित होगा.

iran israel war 2026: ईरान पर ईरान में इन दिनों अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले तेज बताए जा रहे हैं. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई बड़े नेताओं के मारे जाने के दावे किए गए हैं. ईरान ने जवाब में प्रक्षेपास्त्र और मानव रहित विमानों से हमले किए हैं. जानकारों का मानना है कि ईरान लंबे समय तक बहुत तेज और भारी युद्ध नहीं चला सकता. इसकी वजह उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था और सीमित सैन्य क्षमता है. ऊपर से देश के भीतर असंतोष भी बढ़ रहा है. विशेषज्ञ कहते हैं कि यह टकराव अगर लंबा चला तो ईरान के लिए बहुत महंगा साबित होगा. शुरुआत में जवाबी वार संभव हैं. लेकिन समय के साथ उसकी ताकत कमजोर पड़ती जाएगी.
ईरान की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी खराब आर्थिक स्थिति मानी जा रही है. वर्ष दो हजार अठारह में अमेरिका द्वारा कड़े प्रतिबंध लगाए जाने के बाद हालात और बिगड़ गए थे. तेल ईरान की कमाई का सबसे बड़ा साधन है. लेकिन निर्यात पर रोक से आमदनी काफी घट गई है. मुद्रा कमजोर हुई है. महंगाई बहुत बढ़ गई है. आम लोगों का जीवन पहले से कठिन हो चुका है. यदि युद्ध लंबा चला तो तेल उत्पादन और निर्यात पर और असर पड़ेगा. हथियारों, ईंधन और जरूरी सामान पर ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. इससे सरकारी खजाने पर भारी दबाव बनेगा. लोगों में नाराजगी बढ़ेगी. फिर से बड़े विरोध प्रदर्शन होने की आशंका भी जताई जा रही है.
सैन्य ताकत के मामले में ईरान के पास बड़ी संख्या में प्रक्षेपास्त्र और मानव रहित विमान जरूर हैं. माना जाता है कि मध्य पूर्व में उसका भंडार सबसे बड़ा है. लेकिन उसकी सीमाएं भी साफ दिखती हैं. विशेषज्ञों के अनुसार लंबे युद्ध में उसकी वायु रक्षा व्यवस्था और ऊर्जा ढांचा जल्दी नुकसान झेल सकता है. ईरान के पास आधुनिक लड़ाकू विमान कम हैं. इसके मुकाबले अमेरिका और इज़रायल के पास बहुत उन्नत हवाई ताकत है. गुप्त तकनीक वाले लड़ाकू विमान आसानी से ईरानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं. हवा से होने वाले हमलों में यह बढ़त समय के साथ और बढ़ेगी. ईरान छिटपुट और अप्रत्यक्ष तरीकों से नुकसान पहुंचा सकता है. लेकिन पारंपरिक लंबे युद्ध में वह टिक नहीं पाएगा.
ईरान ने दावा किया है कि उसने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और रडार ठिकानों पर वार किए हैं. उसने संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाने की बात कही है. लेकिन अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इन दावों को खारिज किया है. किसी बड़े अमेरिकी अड्डे को भारी नुकसान का पुख्ता प्रमाण सामने नहीं आया है. अमेरिका की निगरानी और चेतावनी प्रणाली बहुत मजबूत मानी जाती है. यह जमीन. जहाज. विमान और उपग्रहों से मिलकर काम करती है. किसी एक हिस्से में बाधा आ सकती है. लेकिन पूरी व्यवस्था को ठप करना लगभग असंभव माना जाता है.
ईरान के लिए सबसे बड़ा खतरा उसके अपने देश के भीतर की स्थिति है. लंबा युद्ध महंगाई और बेरोजगारी को और बढ़ाएगा. इससे आम लोगों की परेशानी भी बढ़ेगी. पहले ही कई बार सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो चुके हैं. यदि हालात और बिगड़े तो बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है. अमेरिका और इज़रायल की रणनीति बड़े नेताओं को निशाना बनाकर व्यवस्था को कमजोर करने की बताई जा रही है. लेकिन ईरान ने वर्षों से ऐसी स्थिति के लिए तैयारी की हुई है. उसकी सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों में बंटी है. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स. सेना और धार्मिक ढांचे अलग अलग तरीके से काम करते हैं. कई नियंत्रण केंद्र जमीन के नीचे बनाए गए हैं. ईरान के समर्थित संगठन जैसे हिज़्बुल्लाह. हूती आंदोलन और हमास भी संघर्ष को आगे बढ़ा सकते हैं. फिर भी जानकारों की राय है कि समय ईरान के खिलाफ काम कर रहा है. वह कुछ सप्ताह या कुछ महीने तक दबाव झेल सकता है. लेकिन वर्षों तक नहीं. इसलिए लंबा युद्ध उसके लिए सबसे नुकसानदेह साबित होगा.
